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बदलते मौसम में बुखार को न लें हल्के में, मलेरिया का हो सकता है संकेत
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बदलते मौसम में बुखार को न लें हल्के में, मलेरिया का हो सकता है संकेत

बदलते मौसम में बुखार को न लें हल्के में, मलेरिया का हो सकता है संकेत

मौसम में बदलाव के साथ बुखार होना आम बात है, लेकिन अगर इसके साथ शरीर में तेज दर्द, ठंड लगना और बार-बार कंपकंपी जैसी शिकायतें हों तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। खासकर बरसात और गर्मी के मौसम में ऐसे लक्षण मच्छरों से फैलने वाली गंभीर बीमारियों की ओर इशारा करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते सही पहचान और इलाज किया जाए।

अक्सर लोग बुखार को साधारण वायरल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही लापरवाही बड़ी बीमारी का रूप ले सकती है। यदि बुखार के साथ ठंड लगना, अत्यधिक पसीना, कमजोरी और शरीर में दर्द लगातार बना रहे, तो यह मलेरिया का संकेत हो सकता है।

मलेरिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के लक्षण, कारण और बचाव के प्रति सचेत करना है। सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य बुखार समझ लेते हैं और सही समय पर जांच नहीं कराते।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मलेरिया आज भी एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है। यह बीमारी संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है और शरीर की लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

शुरुआत में मलेरिया के लक्षण सामान्य बुखार जैसे ही दिखाई देते हैं, जैसे सिरदर्द, थकान, बदन दर्द और भूख कम लगना। लेकिन इसमें बुखार का पैटर्न अलग होता है—पहले ठंड लगती है, फिर तेज बुखार आता है और उसके बाद बहुत ज्यादा पसीना होता है। यह चक्र कुछ घंटों या दिनों के अंतराल में बार-बार दोहर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मलेरिया की सही पहचान केवल लक्षणों के आधार पर नहीं की जा सकती, इसके लिए ब्लड टेस्ट जरूरी होता है। हालांकि कुछ संकेत ऐसे हैं जिनसे सावधानी बरती जा सकती है, जैसे बार-बार बुखार आना, कंपकंपी, उल्टी, चक्कर, और कमजोरी।

मलेरिया का खतरा उन जगहों पर ज्यादा होता है जहां पानी जमा रहता है और साफ-सफाई की कमी होती है। गर्मी और बरसात के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने से इसका जोखिम भी बढ़ जाता है।

वायरल बुखार और मलेरिया में अंतर समझना बेहद जरूरी है। वायरल में बुखार लगातार बना रहता है और इसके साथ खांसी-जुकाम जैसे लक्षण हो सकते हैं, जबकि मलेरिया में बुखार एक तय पैटर्न में आता-जाता है और ठंड-गर्मी के चक्र के साथ जुड़ा होता है।

यदि आपको बार-बार ठंड लगकर बुखार आ रहा है या कमजोरी बढ़ती जा रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और जांच कराएं। समय पर इलाज से इस बीमारी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी लक्षण की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह जरूर लें।

(साभार)

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