देहरादून – डा. नरेश बंसल ने सदन के माध्यम से माननीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जी से पुछा की क्या स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि:-
क- आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के अंतर्गत शामिल किए गए लाभार्थियों की संख्या तथा अस्पताल में भर्ती मामलों के संदर्भ में क्या प्रगति हुई है?
ख- उत्तराखंड राज्य सहित देश के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा कवरेज का विस्तार करने तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं?
ग- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (एबीएचए) जैसी डिजिटल स्वास्थ्य पहलों के विस्तार तथा अन्य योजनाओं के साथ उनके एकीकरण हेतु कौन-कौन से उपाय लागू किये गए हैं।
घ- जेब से होने वाले स्वास्थ्य व्यय को कम करने तथा सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में आगे बढ़ने पर एबी-पीएमजेएवाई का क्या प्रभाव पड़ा है?
माननीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने इसका उत्तर दिया कि:
क और ख- आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) की शुरूआत सितंबर, 2018 में मध्यम और विशिष्ट स्तर की देखभाल हेतु अस्पताल में भर्ती होने पर प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रूपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करने के लिए की गई थी। शुरूआत में ,इस योजना के तहत सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना, 2011 के अंतर्गत पहचाने गए, 10.74 करोड़ परिवारों को शामिल कर दिया गया था, जो भारत की आबादी के सबसे निचले 40 प्रतिशत हिस्से के बराबर थे। जनवरी, 2023 में भारत की एक दशक में जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखते हुए लाभार्थियों का दायरा 10.74 करोड़ से बढ़ाकर 12 करोड़ परिवार कर दिया गया। मार्च 2024 में, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा कार्यकर्ताओं) आंगनबाडी कार्यकर्ताओं और आंगनबाडी सहायिकाओं के लगभग 37 लाख अतिरिक्त परिवारों को इस योजना में शामिल किया गया। इस योजना का और विस्तार करते हुए, सामाजिक आर्थिक स्थिति पर ध्यान न देते हुए, 4.5 करोड़ परिवारों से संबंधित 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को इसके दायरे में लाया गया।
दिनांक 30 जून 2026 तक की स्थिति के अनुसार, इस योजना के तहत अस्पतालों में कुल 12.69 भर्तियों की मंजूरी दी गई है, जिसकी कुल लागत 1.92 लाख करोड़ रूपये से अधिक है।देशभर के 1.86 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से उप स्वास्थ्य केंद्रों (एसएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को सुदृढ़ करे व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान की जा रही है।
भारत सरकार द्वारा सितंबर 2021 में एकीकृत और नागरिक-केंद्रित राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र के विकास में सहायता करने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की शुरूआत की गई थी। सरकार उत्तरोत्तर रूप से कंेद्र और राज्य स्तर के स्वास्थ्य कार्यक्रमों को एबीडीएम के साथ जोड़ रही है। एबी-पीएमजेएवाई, निक्षय (निक्षय), आरसीएच और एनसीडी सहित कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम प्लेटफाॅर्म एबीडीएम के साथ जुड़े हुए हैं। इसके अलावा विभिन्न सरकारी और निजी अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणालियों (एचएमआईएस) को भी एबीडीएम से जोड़ा गया है। इसके परिणाम स्वरूप अब 27 लाख स्वास्थ्य केंद्र एबीडीएम-सक्षम साॅफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं। जिससे ये प्रणालियां आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) बनाने और पूरे डिजिटल तंत्र में बिना किसी रूकावट के डिजिटल स्वास्थ्य रिकाॅर्ड बनाने व साझा करने में सक्षम हो गई है।
सरकार ने एबीडीएम को अपनाने में तीव्रता लाने के लिए कई पहल की है। इनमें त्वरित पंजीकरण और आसानी भुगतान करने के व्यावहारिक तरीकों का विकास, भारत भर में चुनिंदा सरकारी व निजी स्वास्थ्य केंद्रों को पूरी तरह से एबीडीएम से जोड़ने के लिए माॅडल फैसिलिटी पहल तथा डिजिटल स्वास्थ्य रिकाॅर्ड बनाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों एवं डिजिटल समाधान कंपनियों को प्रोत्साहन देना शामिल है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएएचए) ने सी-डैक के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं और विशेष रूप से छोटे स्वास्थ्य केंद्रों के लिए किफायता, एबीडीएम-सक्षम एचएमआईएस तैयार किया है। इसके साथ ही, एनएचए व्यापार मेलों, मैराथन, चिकित्सा सम्मेलनों और तकनीकी कार्यक्रमों जैसे सार्वजनिक आयोजनों में भागीदारी के माध्यम से जागरूकता और नागरिक भागीदारी को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है, ताकि लागों को आभा खाता बनाने और डिजिटल स्वास्थ्य सेवा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। एनएचए, राज्य और संघ राज्य क्षेत्र भी एबीडीएम को अपनाने की प्रकिया को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए लक्षित सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) कार्यकलाप तथा क्षमता निर्माण की पहल कर रहे हैं।
घ- राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान 2022-23 के अनुसार कुल स्वास्थ्य व्यय के अनुपात के रूप में लागों की जेब से होने वाला खर्च वर्ष 2014-15 में 62.6 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2022-23 में 43.4 प्रतिशत हो गया है। इस बड़ी कमी से स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बढे़ सरकारी निवेश और एबी-पीएमजेएवाई जैसी सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के विस्तार के कारण, परिवारों को स्वास्थ्य देखभाल की लागत का एक बड़ा हिस्सा सीधे अपनी जेब से नहीं देना पड़ रहा है।
इसके अलावा कई राज्यों में अपनी राज्य विशिष्ट योजनओं को एबी-पीएमजेएवाई के साथ जोड़कर लाभार्थियों की संख्या को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य से बढ़ा दिया है। एबी-पीएमजेएवाई के तहत लाभार्थियों के दायरे में हुए इस विस्तार ने विभिन्न राज्य स्वास्थ्य योजनाओं के साथ संयुक्त होकर देश भर के कमजोर और वंचित वर्गों के लिए इस योजना की पहुंच में महत्वपूर्ण रूप से वृद्धि की है।
इन पहलों ने योजना के दायरे को व्यापक बनाया है, जिससे सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने के सरकार के दृष्टिकोण को पूरा करने में मदद मिल रही है।

