Uttarakhand – Bharat Samwad https://bharatsamwad.com National News Portal Thu, 23 Jul 2026 15:57:39 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 https://bharatsamwad.com/wp-content/uploads/2024/01/cropped-Bharat-Samwad-512x512-1-32x32.png Uttarakhand – Bharat Samwad https://bharatsamwad.com 32 32 देहरादून महायोजना-2041 : देहरादून के भविष्य पर फिर सुनी जाएगी जनता की आवाज, ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी बात रखने से वंचित न रहे https://bharatsamwad.com/dehradun-master-plan-2041-public-voice-will-be-heard-again-on-the-future-of-dehradun-so-that-no-person-is-deprived-of-expressing-his-views/ Thu, 23 Jul 2026 15:57:39 +0000 https://bharatsamwad.com/dehradun-master-plan-2041-public-voice-will-be-heard-again-on-the-future-of-dehradun-so-that-no-person-is-deprived-of-expressing-his-views/

28 जुलाई से 4 अगस्त तक एमडीडीए कार्यालय में दर्ज होंगे महायोजना-2041 पर सुझाव और आपत्तियां, जनभागीदारी के आधार पर तैयार होगा राजधानी का भविष्य

देहरादून – देहरादून की विकास यात्रा को वर्ष 2041 तक नई दिशा देने वाली महायोजना-2041 में आम जनता की भागीदारी को और मजबूत बनाने के लिए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने एक और बड़ा फैसला लिया है। सेक्टरवार जनसुनवाई का चरण पूरा होने के बाद अब आम नागरिकों को दोबारा अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। 28 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से अपराह्न 2 बजे तक ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एमडीडीए कार्यालय के सभागार में विशेष जनसुनवाई आयोजित होगी, जहां कोई भी इच्छुक नागरिक महायोजना-2041 के प्रारूप पर अपनी राय रख सकेगा।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का मानना है कि राजधानी की भावी तस्वीर केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से तय होगी। यही कारण है कि 6 जुलाई से 21 जुलाई तक विभिन्न सेक्टरों में आयोजित जनसुनवाई के बाद अब एक अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराया गया है, ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी बात रखने से वंचित न रहे।

जनता के सुझावों से तय होगी राजधानी की दिशा
महायोजना-2041 का उद्देश्य देहरादून को वर्ष 2041 तक एक सुनियोजित, आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरणीय दृष्टि से संतुलित राजधानी के रूप में विकसित करना है। प्रस्तावित योजना में सड़क नेटवर्क, यातायात व्यवस्था, आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्र, सार्वजनिक सुविधाएं, जल निकासी, हरित क्षेत्र, पर्यावरण संरक्षण, पार्किंग, जलापूर्ति और भविष्य की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए आधारभूत ढांचे के विकास का व्यापक खाका तैयार किया गया है। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का कहना है कि अंतिम महायोजना तैयार करने से पहले प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का तकनीकी एवं विधिक परीक्षण किया जाएगा, ताकि विकास का मॉडल स्थानीय आवश्यकताओं और जनभावनाओं के अनुरूप बनाया जा सके।

मिला व्यापक जनसमर्थन
महायोजना-2041 के तहत आयोजित सेक्टरवार जनसुनवाई अभियान में क्षेत्र के नागरिकों, भू-स्वामियों, शिक्षाविदों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।जनसुनवाई के दौरान सबसे अधिक चर्चा तेजी से बढ़ते शहरीकरण और उससे उत्पन्न चुनौतियों पर हुई। प्रतिभागियों ने चंद्रबनी, मोहकमपुर और शिमला बाईपास क्षेत्र में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए सड़क नेटवर्क मजबूत करने, सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने, पर्याप्त पार्किंग विकसित करने तथा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नए संपर्क मार्ग तैयार करने के सुझाव दिए।इसके साथ ही जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं के विस्तार को महायोजना का अभिन्न हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया गया।

हरित दून की पहचान बचाने की मांग
जनसुनवाई में पर्यावरण संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल रहा। नागरिकों ने वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण, प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा, हरित क्षेत्रों के विस्तार और खुले सार्वजनिक स्थलों को संरक्षित रखने की मांग की। प्रतिभागियों का कहना था कि देहरादून की पहचान उसकी प्राकृतिक हरियाली और पर्यावरणीय विरासत से है, इसलिए विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना महायोजना की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बने विकास मॉडल
भूमि उपयोग, विकास नियंत्रण नियमों और संस्थागत विकास को लेकर भी कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। लोगों ने कहा कि राजधानी के प्रत्येक क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए विकास मॉडल भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए। एमडीडीए अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि प्राप्त सभी सुझावों का गंभीरता से अध्ययन कर अंतिम प्रारूप में उचित स्थान दिया जाएगा।

बयान : एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 केवल भवनों और सड़कों की योजना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की राजधानी का समग्र विजन है। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान नागरिकों से मिल रहे सुझाव योजना को अधिक व्यवहारिक, जनोन्मुखी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित करना महायोजना का मूल उद्देश्य है। इसी सोच के तहत जनता को पुनः सुझाव देने का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने सभी नागरिकों से अधिकाधिक संख्या में भाग लेकर देहरादून के सुनियोजित भविष्य के निर्माण में सहयोग करने की अपील की।

बयान : एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम तकनीकी, विधिक और व्यावहारिक पहलुओं के आधार पर उनका परीक्षण करेगी। उन्होंने कहा कि महायोजना का उद्देश्य केवल शहरी विस्तार नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार करना है। इसलिए सभी सुझावों को गंभीरता से अंतिम प्रारूप में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।

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ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित होटल एवं रिसॉर्ट्स से बीते पांच वर्षों में जिला पंचायत को प्राप्त राजस्व का दे विवरण- सीडीओ https://bharatsamwad.com/cdo-should-give-details-of-revenue-received-by-district-panchayat-in-the-last-five-years-from-hotels-and-resorts-located-in-rural-areas/ Thu, 23 Jul 2026 15:40:01 +0000 https://bharatsamwad.com/cdo-should-give-details-of-revenue-received-by-district-panchayat-in-the-last-five-years-from-hotels-and-resorts-located-in-rural-areas/

जिले में विकास कार्यों की गुणवत्ता एवं स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष फोकस- मुख्य विकास अधिकारी 

मुख्य विकास अधिकारी ने जिला पंचायत एवं पर्यटन विभाग की समीक्षा बैठक में दिए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश

भीमताल:  जनपद में विकास कार्यों की गुणवत्ता, स्वच्छता व्यवस्था तथा पर्यटन संबंधी परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडेय की अध्यक्षता में जिला पंचायत नैनीताल एवं पर्यटन विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित होटल एवं रिसॉर्ट्स से विगत पांच वर्षों में जिला पंचायत को प्राप्त राजस्व का विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित कूड़ा वाहनों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने को कहा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक कूड़ा वाहन में अनिवार्य रूप से जीपीएस प्रणाली स्थापित की जाए, ताकि वाहनों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जा सके। इसके अतिरिक्त कूड़ा निस्तारण के लिए पर्याप्त रोस्टर तैयार करने, संबंधित राजस्व निरीक्षकों एवं कर संग्राहकों की नियमित निगरानी में कूड़ा वाहनों का संचालन सुनिश्चित करने तथा सभी वाहन चालकों के मोबाइल नंबर उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए।

मुख्य विकास अधिकारी ने एनएच-87 रानीबाग से रूसी बाईपास तक माह में कम से कम सात दिन वैक्यूम क्लीनिंग मशीन संचालित किए जाने के निर्देश देते हुए स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया।

बैठक में जिला पंचायत के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कार्यों एवं दायित्वों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। उन्होंने जिला पंचायत द्वारा कराए जा रहे सभी निर्माण कार्यों का नियमित स्थलीय निरीक्षण कर गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को जिला पंचायत से संबंधित विभिन्न कार्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। वहीं जिला पर्यटन अधिकारी को जिला योजना, राज्य योजना एवं केंद्र पोषित योजनाओं के अंतर्गत संचालित निर्माण कार्यों की प्रारंभ एवं पूर्णता तिथि अंकित करते हुए नियमित निरीक्षण कर समयबद्ध रूप से कार्य पूर्ण कराना सुनिश्चित करने को कहा।

मुख्य विकास अधिकारी ने जनपद में अवैध रूप से संचालित होम-स्टे एवं होटलों का नियमित निरीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता, स्वच्छता व्यवस्था में सुधार तथा पर्यटन गतिविधियों का सुव्यवस्थित संचालन जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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जल्द शुरू होने जा रहा ऋषिपर्णा नदी के पुनर्जीवन का श्रीगणेश , उद्गम से होगा जीर्णोद्धार- डॉ. आशीष चौहान https://bharatsamwad.com/rejuvenation-of-rishiparna-river-is-going-to-start-soon-renovation-will-be-done-from-shri-ganesh-udgam-dr-ashish-chauhan/ Thu, 23 Jul 2026 15:14:31 +0000 https://bharatsamwad.com/rejuvenation-of-rishiparna-river-is-going-to-start-soon-renovation-will-be-done-from-shri-ganesh-udgam-dr-ashish-chauhan/

बार्लोगंज से काठबंगला तक 10 किमी क्षेत्र का प्लान तैयार, डीएम ने सभी विभागों को दिए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश

नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, हमारी संस्कृति और सांसों की डोरी-डीएम

देहरादून:  जिला प्रशासन ने देहरादून की जीवनरेखा मानी जाने वाली ऋषिपर्णा (रिस्पना) नदी के पुनर्जीवन की दिशा में बड़ी पहल करते हुए उद्गम स्थल से इसके जीर्णाेद्धार की कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। प्रथम चरण में बार्लोगंज से काठबंगला तक लगभग 10 किलोमीटर क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा कर कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।

कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आयोजित जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक में संबंधित विभागों को निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप अभियान को गति देने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि स्वच्छ एवं निर्मल नदियाँ केवल पर्यावरण संरक्षण का ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का भी आधार हैं। उन्होंने कहा कि नदियों को प्रदूषणमुक्त रखना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है और इसके लिए प्रशासन तथा समाज को मिलकर कार्य करना होगा।

उन्होंने निर्देश दिए कि प्रथम चरण में ऋषिपर्णा नदी बेसिन के ऊपरी क्षेत्र में भू-जल पुनर्भरण के लिए छोटे-छोटे चेकडैमों का निर्माण, व्यापक पौधरोपण, सौंदर्यीकरण तथा ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के माध्यम से स्रोत क्षेत्र को स्वच्छ एवं संरक्षित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि साबरमती नदी के पुनर्जीवन में कार्य कर चुकी विशेषज्ञ टीम से तकनीकी सहयोग लिया जाए तथा पर्यावरण मित्रों और स्वयंसेवी संस्थाओं की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए इस अभियान को जनभागीदारी आधारित ‘ग्रैंड अभियान’ के रूप में संचालित किया जाए।

जिलाधिकारी ने नगर पालिका मसूरी को लालटिब्बा से शिखर फॉल तक तथा नगर निगम देहरादून को काठबंगला से डाउनस्ट्रीम क्षेत्र तक विशेष स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही सिंचाई विभाग को चेकडैम निर्माण एवं तटों के सुदृढ़ीकरण के लिए शीघ्र कंसल्टेंसी फर्म के साथ अनुबंध करने को कहा।

उन्होंने निर्देश दिए कि मैदानी क्षेत्रों में ऋषिपर्णा नदी में मिलने वाले सभी छोटे-बड़े नालों और सीवर के दूषित जल का उपचार सुनिश्चित किया जाए। साथ ही नालों के माध्यम से नदी में पहुंचने वाले ठोस अपशिष्ट और सिंगल यूज प्लास्टिक को रोकने के लिए जालियां लगाकर पृथक्करण (सेग्रीगेशन) की व्यवस्था की जाए। उन्होंने आमजन को जागरूक करने के साथ ही नदी में कूड़ा-करकट डालने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए चालान करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में नगर निगम, नगर पालिका, सिंचाई एवं वन विभाग के अधिकारियों ने अवगत कराया कि नदी में गिरने वाले सभी छोटे-बड़े नालों तथा गारबेज प्वाइंट्स का चिन्हांकन पूरा कर लिया गया है। डम्पिंग साइट के चयन के बाद बजट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं नदी बेसिन के ऊपरी क्षेत्र में चेकडैम निर्माण एवं उनके सुदृढ़ीकरण के लिए डीपीआर तैयार करने और विशेषज्ञ फर्म के चयन की कार्रवाई भी प्रगति पर है।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, अधीक्षण अभियंता संजय राय सहित वन, सिंचाई, नगर निगम एवं नगर पालिका के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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बड़ी खबर : उत्तराखंड में नकल माफियाओं पर एक और बड़ी कार्रवाई, यूटीयू की सेमेस्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र आउट करने के आरोप में सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार https://bharatsamwad.com/big-news-another-big-action-against-cheating-mafia-in-uttarakhand/ Thu, 23 Jul 2026 14:47:29 +0000 https://bharatsamwad.com/big-news-another-big-action-against-cheating-mafia-in-uttarakhand/

सीएम पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देश, नकल माफियाओं को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी

देहरादून:  उत्तराखंड में भर्ती एवं शैक्षणिक परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए चल रहे अभियान के तहत दून पुलिस ने नकल माफियाओं के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की सेमेस्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र आउट करने के आरोप में शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, झाझरा के सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है।

कोतवाली प्रेमनगर में परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल की तहरीर पर दर्ज मुकदमे के अनुसार 8 जुलाई को आयोजित यूटीयू की सम-सेमेस्टर परीक्षा से पहले आरोपी सहायक प्रोफेसर ने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न छात्रों के साथ साझा किए थे। परीक्षा संपन्न होने के बाद प्रश्नपत्र का मिलान करने पर साझा किए गए प्रश्नों में काफी समानता पाई गई। विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति ने भी अपनी जांच में पाया कि परीक्षा से पूर्व छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप एवं अन्य माध्यमों पर समान प्रश्न साझा किए गए थे।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साक्ष्य संकलित किए और आरोपी सहायक प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया। मामले में बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है तथा इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि चाहे भर्ती परीक्षाएं हों या विश्वविद्यालय की परीक्षाएं, किसी भी प्रकार की नकल, प्रश्नपत्र लीक या परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता भंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लागू सख्त नकलरोधी कानून और लगातार की जा रही कार्रवाई के परिणामस्वरूप विभिन्न मामलों में अब तक 100 से अधिक नकल माफियाओं एवं उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के मेहनती और प्रतिभाशाली युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराना है और इस दिशा में अभियान आगे भी पूरी सख्ती से जारी रहेगा।

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मुख्य विकास अधिकारी ने की जिला दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र की प्रबंध समिति की बैठक, दिए अहम निर्देश  https://bharatsamwad.com/chief-development-officer-held-a-meeting-of-the-management-committee-of-the-district-disabled-and-rehabilitation-center-and-gave-important-instructions/ Thu, 23 Jul 2026 14:38:30 +0000 https://bharatsamwad.com/chief-development-officer-held-a-meeting-of-the-management-committee-of-the-district-disabled-and-rehabilitation-center-and-gave-important-instructions/

डीडीआरसी के वार्षिक बजट को मंजूरी, दिव्यांगजनों के लिए अस्पताल परिसर में कैंटीन संचालन की कार्ययोजना बनाने के निर्देश

 

देहरादून: जिलाधिकारी देहरादून के निर्देशों के क्रम में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह की अध्यक्षता में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जिला दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी), गांधी शताब्दी जिला राजकीय चिकित्सालय, देहरादून की त्रैमासिक जिला प्रबंध समिति (डीएमटी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्र द्वारा विगत छह माह में किए गए कार्यों, उपलब्धियों एवं भविष्य की कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल ने बताया कि डीडीआरसी द्वारा पिछले छह माह के दौरान 950 दिव्यांगजनों के नवीन यूडीआईडी (UDID) कार्ड बनाए गए, जबकि 95 यूडीआईडी कार्डों का नवीनीकरण किया गया। उन्होंने बताया कि केंद्र के माध्यम से दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र एवं यूडीआईडी कार्ड बनवाने में सहायता एवं समन्वय प्रदान किया जाता है। साथ ही पात्र लाभार्थियों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, श्रवण यंत्र, कृत्रिम अंग, बैसाखी, ब्रेल किट सहित विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।

उन्होंने अवगत कराया कि केंद्र में फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श जैसी पुनर्वास सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अतिरिक्त दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन, छात्रवृत्ति, कौशल विकास, स्वरोजगार एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य भी किया जा रहा है। स्वास्थ्य, शिक्षा एवं अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर दिव्यांगजनों को आवश्यक सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही समय-समय पर जागरूकता एवं स्क्रीनिंग शिविर आयोजित कर दिव्यांगता की प्रारंभिक पहचान एवं जनजागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बैठक में जिला प्रबंध समिति द्वारा डीडीआरसी के वर्षभर के संचालन हेतु लगभग ₹25 लाख के वार्षिक बजट का अनुमोदन किया गया। साथ ही केंद्र की कार्यक्षमता को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए एक नवीन कंप्यूटर, प्रिंटर तथा फिजियोथेरेपी हेतु आवश्यक उपकरण एवं अन्य सामग्री क्रय किए जाने की भी स्वीकृति प्रदान की गई।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने निर्देशित किया कि गांधी शताब्दी जिला राजकीय चिकित्सालय परिसर में दिव्यांगजनों द्वारा संचालित एक कैंटीन स्थापित किए जाने की कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे दिव्यांगजनों को स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने जिला समाज कल्याण अधिकारी को इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि जिला दिव्यांग एवं पुनर्वास केंद्र के माध्यम से दिव्यांगजनों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं, सहायक उपकरणों एवं विभिन्न योजनाओं का सोशल मीडिया एवं अन्य जनसंचार माध्यमों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र दिव्यांगजन इन सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

बैठक में डीडीआरसी की नोडल अधिकारी ललिता चमोली, डॉ. कपिल पूनिया, राजकीय दून चिकित्सालय एवं राजकीय कोरोनेशन चिकित्सालय के चिकित्सक तथा समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

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भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष एवं सांसद राज्यसभा डा. नरेश बंसल ने अतारांकित प्रश्न संख्या 293 के माध्यम से आयुष्मान भारत और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज संबिधत प्रश्न किया https://bharatsamwad.com/bjp-national-co-treasurer-and-mp-rajya-sabha-dr-naresh-bansal-through-unstarred-question-number-293-on-ayushman-bharat-and-universal/ Thu, 23 Jul 2026 13:15:27 +0000 https://bharatsamwad.com/bjp-national-co-treasurer-and-mp-rajya-sabha-dr-naresh-bansal-through-unstarred-question-number-293-on-ayushman-bharat-and-universal/

देहरादून – डा. नरेश बंसल ने सदन के माध्यम से माननीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जी से पुछा की क्या स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि:-

क- आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के अंतर्गत शामिल किए गए लाभार्थियों की संख्या तथा अस्पताल में भर्ती मामलों के संदर्भ में क्या प्रगति हुई है?

ख- उत्तराखंड राज्य सहित देश के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा कवरेज का विस्तार करने तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं?

ग- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (एबीएचए) जैसी डिजिटल स्वास्थ्य पहलों के विस्तार तथा अन्य योजनाओं के साथ उनके एकीकरण हेतु कौन-कौन से उपाय लागू किये गए हैं।

घ- जेब से होने वाले स्वास्थ्य व्यय को कम करने तथा सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में आगे बढ़ने पर एबी-पीएमजेएवाई का क्या प्रभाव पड़ा है?

माननीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने इसका उत्तर दिया कि:

क और ख- आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) की शुरूआत सितंबर, 2018 में मध्यम और विशिष्ट स्तर की देखभाल हेतु अस्पताल में भर्ती होने पर प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रूपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करने के लिए की गई थी। शुरूआत में ,इस योजना के तहत सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना, 2011 के अंतर्गत पहचाने गए, 10.74 करोड़ परिवारों को शामिल कर दिया गया था, जो भारत की आबादी के सबसे निचले 40 प्रतिशत हिस्से के बराबर थे। जनवरी, 2023 में भारत की एक दशक में जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखते हुए लाभार्थियों का दायरा 10.74 करोड़ से बढ़ाकर 12 करोड़ परिवार कर दिया गया। मार्च 2024 में, मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा कार्यकर्ताओं) आंगनबाडी कार्यकर्ताओं और आंगनबाडी सहायिकाओं के लगभग 37 लाख अतिरिक्त परिवारों को इस योजना में शामिल किया गया। इस योजना का और विस्तार करते हुए, सामाजिक आर्थिक स्थिति पर ध्यान न देते हुए, 4.5 करोड़ परिवारों से संबंधित 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को इसके दायरे में लाया गया।

दिनांक 30 जून 2026 तक की स्थिति के अनुसार, इस योजना के तहत अस्पतालों में कुल 12.69 भर्तियों की मंजूरी दी गई है, जिसकी कुल लागत 1.92 लाख करोड़ रूपये से अधिक है।देशभर के 1.86 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से उप स्वास्थ्य केंद्रों (एसएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को सुदृढ़ करे व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान की जा रही है।

भारत सरकार द्वारा सितंबर 2021 में एकीकृत और नागरिक-केंद्रित राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र के विकास में सहायता करने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की शुरूआत की गई थी। सरकार उत्तरोत्तर रूप से कंेद्र और राज्य स्तर के स्वास्थ्य कार्यक्रमों को एबीडीएम के साथ जोड़ रही है। एबी-पीएमजेएवाई, निक्षय (निक्षय), आरसीएच और एनसीडी सहित कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम प्लेटफाॅर्म एबीडीएम के साथ जुड़े हुए हैं। इसके अलावा विभिन्न सरकारी और निजी अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणालियों (एचएमआईएस) को भी एबीडीएम से जोड़ा गया है। इसके परिणाम स्वरूप अब 27 लाख स्वास्थ्य केंद्र एबीडीएम-सक्षम साॅफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं। जिससे ये प्रणालियां आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) बनाने और पूरे डिजिटल तंत्र में बिना किसी रूकावट के डिजिटल स्वास्थ्य रिकाॅर्ड बनाने व साझा करने में सक्षम हो गई है।

सरकार ने एबीडीएम को अपनाने में तीव्रता लाने के लिए कई पहल की है। इनमें त्वरित पंजीकरण और आसानी भुगतान करने के व्यावहारिक तरीकों का विकास, भारत भर में चुनिंदा सरकारी व निजी स्वास्थ्य केंद्रों को पूरी तरह से एबीडीएम से जोड़ने के लिए माॅडल फैसिलिटी पहल तथा डिजिटल स्वास्थ्य रिकाॅर्ड बनाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों एवं डिजिटल समाधान कंपनियों को प्रोत्साहन देना शामिल है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएएचए) ने सी-डैक के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं और विशेष रूप से छोटे स्वास्थ्य केंद्रों के लिए किफायता, एबीडीएम-सक्षम एचएमआईएस तैयार किया है। इसके साथ ही, एनएचए व्यापार मेलों, मैराथन, चिकित्सा सम्मेलनों और तकनीकी कार्यक्रमों जैसे सार्वजनिक आयोजनों में भागीदारी के माध्यम से जागरूकता और नागरिक भागीदारी को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है, ताकि लागों को आभा खाता बनाने और डिजिटल स्वास्थ्य सेवा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। एनएचए, राज्य और संघ राज्य क्षेत्र भी एबीडीएम को अपनाने की प्रकिया को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए लक्षित सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) कार्यकलाप तथा क्षमता निर्माण की पहल कर रहे हैं।

घ- राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान 2022-23 के अनुसार कुल स्वास्थ्य व्यय के अनुपात के रूप में लागों की जेब से होने वाला खर्च वर्ष 2014-15 में 62.6 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2022-23 में 43.4 प्रतिशत हो गया है। इस बड़ी कमी से स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में बढे़ सरकारी निवेश और एबी-पीएमजेएवाई जैसी सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के विस्तार के कारण, परिवारों को स्वास्थ्य देखभाल की लागत का एक बड़ा हिस्सा सीधे अपनी जेब से नहीं देना पड़ रहा है।

इसके अलावा कई राज्यों में अपनी राज्य विशिष्ट योजनओं को एबी-पीएमजेएवाई के साथ जोड़कर लाभार्थियों की संख्या को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य से बढ़ा दिया है। एबी-पीएमजेएवाई के तहत लाभार्थियों के दायरे में हुए इस विस्तार ने विभिन्न राज्य स्वास्थ्य योजनाओं के साथ संयुक्त होकर देश भर के कमजोर और वंचित वर्गों के लिए इस योजना की पहुंच में महत्वपूर्ण रूप से वृद्धि की है।

इन पहलों ने योजना के दायरे को व्यापक बनाया है, जिससे सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्राप्त करने के सरकार के दृष्टिकोण को पूरा करने में मदद मिल रही है।

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कौन्ता–ककोड़–हरीशताल मोटर मार्ग की गुणवत्ता की होगी उच्चस्तरीय जांच- जिलाधिकारी https://bharatsamwad.com/district-magistrate-will-conduct-high-level-investigation-on-the-quality-of-kaunta-kakod-harishtal-motor-road/ Thu, 23 Jul 2026 12:26:26 +0000 https://bharatsamwad.com/district-magistrate-will-conduct-high-level-investigation-on-the-quality-of-kaunta-kakod-harishtal-motor-road/

जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की, तीन सप्ताह में मांगी विस्तृत आख्या

नैनीताल: जनपद में विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा जनप्रतिनिधियों एवं आमजन की शिकायतों का पारदर्शी एवं समयबद्ध निस्तारण करने के क्रम में जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने पीएमजीएसवाई, काठगोदाम खंड के अंतर्गत निर्मित कौन्ता–ककोड़–हरीशताल मोटर मार्ग (ओखलकांडा) की गुणवत्ता की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।

उल्लेखनीय है कि उक्त मोटर मार्ग की गुणवत्ता को लेकर विभिन्न जनप्रतिनिधियों द्वारा शिकायतें प्राप्त हुई थीं। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मार्ग का स्थलीय निरीक्षण एवं गुणवत्ता परीक्षण कराए जाने के निर्देश दिए हैं, ताकि निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन किया जा सके।

गठित जांच समिति में मुख्य विकास अधिकारी, नैनीताल को अध्यक्ष तथा लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता एवं सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को सदस्य नामित किया गया है।

जिलाधिकारी ने समिति को निर्देशित किया है कि वह कार्यस्थल का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण, निर्माण गुणवत्ता का परीक्षण तथा संबंधित अभिलेखों का परीक्षण करते हुए तीन सप्ताह के भीतर अपनी स्पष्ट एवं तथ्यपरक जांच आख्या प्रस्तुत करना सुनिश्चित करे।

जिलाधिकारी ने संबंधित कार्यदायी संस्था को भी निर्देश दिए हैं कि जांच समिति के साथ पूर्ण समन्वय स्थापित करते हुए सभी आवश्यक अभिलेख एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर अनियमितता अथवा लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा जनहित से जुड़े प्रत्येक निर्माण कार्य में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

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रायवाला में 500 किलो गौमांस के साथ तस्कर गिरफ्तार https://bharatsamwad.com/smuggler-arrested-with-500-kg-beef-in-raiwala/ Thu, 23 Jul 2026 11:51:29 +0000 https://bharatsamwad.com/smuggler-arrested-with-500-kg-beef-in-raiwala/

देहरादून। जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत रायवाला पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 500 किलोग्राम संदिग्ध गौमांस के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल की जा रही वैन भी कब्जे में ले ली है। आरोपी के दो साथी मौके से फरार हो गए, जिनकी तलाश जारी है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जनपदभर में संदिग्ध व्यक्तियों और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को रायवाला पुलिस नेपाली फार्म तिराहे पर वाहन चेकिंग कर रही थी। इस दौरान हरिद्वार की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार वैन को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक वाहन लेकर फरार हो गया।

पुलिस टीम ने पीछा किया तो छिद्दरवाला के पास वैन आगे चल रहे एक ट्रक से टकरा गई। हादसे के बाद चालक वाहन में फंस गया, जिसे पुलिस ने रेस्क्यू कर बाहर निकाला। तलाशी के दौरान वैन से 10 कट्टों में करीब 500 किलोग्राम मांस बरामद हुआ।

पूछताछ में आरोपी ने अपनी पहचान मोहम्मद अमन (23 वर्ष) निवासी कारगी चौक, देहरादून के रूप में बताई। उसने पुलिस को बताया कि बरामद मांस गौवंश का है, जिसे वह बिजनौर निवासी एक व्यक्ति से लेकर देहरादून के विभिन्न स्थानों पर सप्लाई करने जा रहा था। उसने यह भी बताया कि उसके दो साथी मोटरसाइकिल से पीछे-पीछे चल रहे थे, जो पुलिस कार्रवाई देखकर फरार हो गए।

मौके पर बुलाए गए पशु चिकित्साधिकारी ने मांस का परीक्षण किया। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में खाल, खुर और अन्य अवशेषों के आधार पर इसे गौवंशीय मांस होने की पुष्टि की गई। इसके बाद आरोपी के खिलाफ उत्तराखंड गोवंश संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से लगभग 500 किलोग्राम गौवंशीय मांस और तस्करी में प्रयुक्त वैन बरामद की है। फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

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उत्तराखंड में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम होगा मजबूत, 112 से जुड़ेंगी सभी हेल्पलाइन https://bharatsamwad.com/emergency-response-system-will-be-strengthened-in-uttarakhand-all-helplines-will-be-connected-to-112/ Thu, 23 Jul 2026 11:28:09 +0000 https://bharatsamwad.com/emergency-response-system-will-be-strengthened-in-uttarakhand-all-helplines-will-be-connected-to-112/

दुर्घटना पीड़ितों को तुरंत मिलेगी पुलिस, फायर और मेडिकल सहायता

देहरादून। सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्ति को त्वरित एवं प्रभावी ट्रॉमा चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराए जाने के दृष्टिगत मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा सभी राज्यों को जारी किए गए आदेशों के क्रम में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने समन्वित, प्रभावी एवं समयबद्ध आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली स्थापित किए जाने हेतु सम्बन्धित विभागों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने मा. न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सभी आपातकालीन हेल्पलाईन सेवाओं को एकीकृत आपातकालीन हेल्पलाईन 112 से तकनीकी एवं परिचालानात्मक रूप से जोड़े जाने के निर्देश दिए। उन्होंने मा. न्यायालय द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए इसका आमजन तक प्रचार-प्रसार किए जाने की बात भी कही। कहा कि सभी आपातकालीन हेल्पलाईनों का एकीकरण हो जाने के बाद हेल्पलाइन 112 पर पुलिस, फायर एवं मेडिकल सुविधा जैसी आपातकालीन सेवाएं तत्काल मिल सकेंगी। उन्होंने इसके लिए बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप वाला ऑटोमैटिक मैकेनिल्म तैयार किया जाने की बात भी कही, ताकि मेडिकल हेल्प, फायर या पुलिस सहायता के लिए 112 पर कॉल करने वाले व्यक्ति को वांछित सहायता तत्काल उपलब्ध करायी जा सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि गुड सेमेरिटन शिकायत निवारण तंत्र के लिए राज्य स्तर पर डीजी हेल्थ को नोडल आधिकारी एवं जनपद स्तर पर सीएमओ को नोडल अधिकारी नामित करते हुए मासिक बैठकें आयोजित की जाएं एवं बैठकों का कार्यवृत्त पोर्टल पर अपलोड किए जाएं। उन्होंने सभी सार्वजनिक एवं निजी एम्बुलेंसों में एआईएस-125 मानकों का अनुपालन एवं जीपीएस/वीएलटीडी उपकरणों की स्थापना सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसकी प्रभावी निगरानी के लिए हेल्पलाईन 112 से रियल टाईम इंटीग्रेशन किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि ट्रॉमा रजिस्ट्री के लिए नोडल विभाग परिवहन विभाग होगा। उन्होंने परिवहन विभाग को राज्य स्तरीय ट्रॉमा रजिस्ट्री स्थापित करते हुए सभी चिकित्सा संस्थानों को इससे इंटीग्रेट किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसे राष्ट्रीय ट्रॉमा रजिस्ट्री से भी जोड़ा जाए। उन्होंने पीएम राहत (PM-RAHAT) योजना का शत्-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया।

इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, अपर सचिव विनीत कुमार, रोहित मीणा, श्रीमती तृप्ति भट्ट एवं संयुक्त परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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लक्ष्मणझूला क्षेत्र में गंगा नदी में स्नान के दौरान युवक डूबा, SDRF का सर्च अभियान जारी https://bharatsamwad.com/youth-drowns-while-bathing-in-river-ganga-in-laxmanjhula-area-sdrf-search-operation-continues/ Thu, 23 Jul 2026 11:14:10 +0000 https://bharatsamwad.com/youth-drowns-while-bathing-in-river-ganga-in-laxmanjhula-area-sdrf-search-operation-continues/

ऋषिकेश – आज  प्रातः लगभग 10:00 बजे थाना लक्ष्मणझूला से सूचना प्राप्त हुई कि बजरंग सेतु के समीप घाट पर स्नान के दौरान एक युवक गंगा नदी के तेज बहाव में बहकर लापता हो गया है।

सूचना प्राप्त होते ही SDRF पोस्ट ढालवाला की टीम आवश्यक डीप डाइविंग उपकरणों के साथ तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, डूबा हुआ युवक अपने तीन अन्य साथियों के साथ लक्ष्मणझूला क्षेत्र घूमने आया था। सभी युवक गंगा नदी में स्नान करने के लिए घाट पर उतरे थे। स्नान के दौरान एक युवक का संतुलन बिगड़ गया, जिससे वह तेज बहाव की चपेट में आकर नदी में बह गया और डूब गया।

घटनास्थल पर पहुंचकर SDRF टीम द्वारा डीप डाइविंग उपकरणों की सहायता से नदी की गहराइयों में सघन सर्च अभियान चलाया गया। इसके अतिरिक्त घटनास्थल से लेकर पशुलोक बैराज तक नदी के सभी संभावित स्थानों पर खोजबीन की जा रही है। फिलहाल युवक का कोई पता नहीं चल सका है तथा सर्च अभियान लगातार जारी है।

डूबे हुए युवक की पहचान शिवांशु राज, पुत्र अनूप पांडे, आयु 22 वर्ष के रूप में हुई है। युवक मूल रूप से जिला पश्चिम चंपारण (बेतिया), बिहार का निवासी था तथा वर्तमान में चावला हाउस, सेकंड फ्लोर, नेहरू प्लेस, नई दिल्ली में रहकर एक निजी कंपनी में कार्यरत था।

घटना की सूचना युवक के परिजनों को दे दी गई है। मौके पर लक्ष्मणझूला पुलिस, स्थानीय जल पुलिस एवं SDRF की टीम संयुक्त रूप से आवश्यक कार्रवाई एवं सर्च अभियान में जुटी हुई है।

SDRF की अपील

SDRF सभी श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से अपील करती है कि वर्षा ऋतु के दौरान गंगा नदी का जलस्तर एवं बहाव अत्यधिक बढ़ जाता है। अतः किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें, प्रतिबंधित अथवा असुरक्षित स्थानों पर स्नान न करें तथा प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करते हुए केवल निर्धारित एवं सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें। आपकी सतर्कता ही आपकी सुरक्षा है।

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