lifestyle – Bharat Samwad https://bharatsamwad.com National News Portal Sat, 18 Jul 2026 08:19:14 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 https://bharatsamwad.com/wp-content/uploads/2024/01/cropped-Bharat-Samwad-512x512-1-32x32.png lifestyle – Bharat Samwad https://bharatsamwad.com 32 32 सिर्फ मोटापा नहीं, कमजोर मांसपेशियां भी बढ़ाती हैं डायबिटीज का खतरा! नए अध्ययन में बड़ा खुलासा https://bharatsamwad.com/not-only-obesity-weak-muscles-also-increase-the-risk-of-diabetes/ Sat, 18 Jul 2026 08:19:14 +0000 https://bharatsamwad.com/not-only-obesity-weak-muscles-also-increase-the-risk-of-diabetes/

14 साल तक 4.79 लाख लोगों पर हुई रिसर्च, शरीर में ज्यादा फैट और कमजोर मांसपेशियों वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम सबसे अधिक

क्या डायबिटीज का खतरा सिर्फ बढ़ते वजन से जुड़ा है? एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस धारणा को चुनौती दी है। शोध के अनुसार, केवल शरीर में अतिरिक्त चर्बी (फैट) ही नहीं, बल्कि कमजोर मांसपेशियां (Poor Muscle Health) भी टाइप-2 डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ा सकती हैं।

अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों के शरीर में अधिक वसा (Obesity) के साथ-साथ मांसपेशियों की ताकत और कार्यक्षमता भी कम थी, उनमें स्वस्थ शरीर संरचना वाले लोगों की तुलना में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा साढ़े तीन गुना से अधिक था।

यह शोध प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Diabetes Care में प्रकाशित हुआ है।

क्या है सार्कोपेनिक ओबेसिटी?

शोध में जिस स्थिति का सबसे ज्यादा उल्लेख किया गया, उसे सार्कोपेनिक ओबेसिटी (Sarcopenic Obesity) कहा जाता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति के शरीर में फैट अधिक हो और साथ ही मांसपेशियों का द्रव्यमान, ताकत या कार्यक्षमता कम हो।

शोधकर्ताओं के मुताबिक—

  • सार्कोपेनिक ओबेसिटी वाले लोगों में सिर्फ मोटापे वाले लोगों की तुलना में डायबिटीज का खतरा 19% अधिक पाया गया।
  • वहीं, केवल मांसपेशियों की कमजोरी (सार्कोपेनिया) वाले लोगों की तुलना में यह जोखिम 91% अधिक था।

14 साल तक चला अध्ययन

ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक के 4,79,607 ऐसे लोगों के स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण किया, जिन्हें अध्ययन की शुरुआत में डायबिटीज नहीं थी।

करीब 14 वर्षों तक चले इस अध्ययन के दौरान लगभग 32,950 प्रतिभागियों को टाइप-2 डायबिटीज हो गई।

हर 100 में 15 लोग हुए डायबिटीज के शिकार

अध्ययन के अनुसार—

  • सार्कोपेनिक ओबेसिटी वाले लगभग 15% लोगों को 10 वर्षों के भीतर टाइप-2 डायबिटीज हुई।
  • केवल मोटापे वाले लोगों में यह आंकड़ा करीब 11% रहा।
  • जबकि जिन लोगों में न मोटापा था और न मांसपेशियों की कमजोरी, उनमें यह दर केवल 3% रही।

शोध में यह संबंध विशेष रूप से महिलाओं और 60 वर्ष से कम उम्र के लोगों में अधिक मजबूत पाया गया।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

अध्ययन के मुख्य लेखक झोंगयांग गुआन के अनुसार, यह शोध इस धारणा को बदलता है कि डायबिटीज का जोखिम केवल वजन पर निर्भर करता है। उनका कहना है कि शरीर की मांसपेशियों की सेहत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

वहीं, अध्ययन के वरिष्ठ लेखक प्रोफेसर मारियो सिएर्वो ने कहा कि डायबिटीज से बचाव के लिए केवल वजन घटाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। शरीर में फैट कम करने के साथ-साथ मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखना भी जरूरी है।

डायबिटीज से बचाव के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों के अनुसार टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने के लिए—

  • नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और शारीरिक गतिविधि करें।
  • पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन युक्त संतुलित आहार लें।
  • शरीर में अतिरिक्त चर्बी नियंत्रित रखें।
  • नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
  • यदि परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराएं।

नोट: यह अध्ययन दो कारकों—शरीर में फैट और मांसपेशियों की सेहत—के बीच संबंध दिखाता है। यह यह साबित नहीं करता कि मांसपेशियों की कमजोरी अकेले डायबिटीज का कारण बनती है, लेकिन यह जोखिम का एक महत्वपूर्ण संकेतक हो सकती है।

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प्रेग्नेंसी में दादी-नानी की हर सलाह अंधविश्वास नहीं! इन 6 पारंपरिक बातों को साइंस भी मानता है सही https://bharatsamwad.com/every-grandmothers-advice-during-pregnancy-is-not-superstition-these-6-traditional-things-are-also-accepted-by-science-as-correct/ Sat, 18 Jul 2026 08:12:15 +0000 https://bharatsamwad.com/every-grandmothers-advice-during-pregnancy-is-not-superstition-these-6-traditional-things-are-also-accepted-by-science-as-correct/

घी खाना, तनाव से बचना, बच्चे से बातें करना और पर्याप्त आराम जैसी सलाह के पीछे छिपे हैं वैज्ञानिक कारण

प्रेग्नेंसी के दौरान घर के बड़े-बुजुर्ग, खासकर दादी-नानी, कई तरह की सलाह देती हैं। आधुनिक दौर में इन्हें अक्सर पुराने जमाने की बातें या अंधविश्वास समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार इनमें से कई सलाह ऐसी हैं, जिनके पीछे ठोस वैज्ञानिक आधार मौजूद है।

डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान खानपान, मानसिक स्थिति और दैनिक आदतें मां और गर्भ में पल रहे शिशु, दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। आइए जानते हैं प्रेग्नेंसी से जुड़ी ऐसी ही कुछ पारंपरिक सलाह, जिन्हें विज्ञान भी सही मानता है।

1. सीमित मात्रा में घी खाना फायदेमंद हो सकता है

गर्भावस्था में घी खाने की सलाह वर्षों से दी जाती रही है। वैज्ञानिक दृष्टि से घी में मौजूद कुछ फैटी एसिड, जैसे ब्यूटिरिक एसिड, शरीर के लिए उपयोगी हो सकते हैं। यह पाचन तंत्र के स्वास्थ्य में मदद करता है और संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घी का सेवन संतुलित मात्रा में ही करें। अधिक मात्रा में घी खाने से अनावश्यक वजन बढ़ सकता है। इसलिए अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर रहता है।

2. तनाव और गुस्से से बचना जरूरी

दादी-नानी अक्सर गर्भवती महिलाओं को गुस्सा न करने और खुश रहने की सलाह देती हैं। विज्ञान भी बताता है कि लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर में कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ा सकता है, जिसका असर मां और गर्भस्थ शिशु दोनों पर पड़ सकता है।

इसलिए गर्भावस्था के दौरान मानसिक शांति, पर्याप्त नींद और सकारात्मक माहौल बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

3. बच्चे से बातें करें, गाना गाएं और पढ़ें

गर्भावस्था के मध्य चरण में भ्रूण की सुनने की क्षमता विकसित होने लगती है। ऐसे में मां का बच्चे से बातें करना, मधुर संगीत सुनना या किताब पढ़ना भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने में मदद कर सकता है।

हालांकि यह कहना कि इससे बच्चे की बुद्धिमत्ता निश्चित रूप से बढ़ जाएगी, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है। लेकिन मां के तनाव को कम करने और सकारात्मक वातावरण बनाने में यह लाभदायक माना जाता है।

4. अकेले खाना खाने से बचें

परिवार के साथ बैठकर भोजन करना केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं है। शोध बताते हैं कि भावनात्मक सहयोग और सकारात्मक माहौल भोजन की आदतों, मानसिक स्वास्थ्य और तनाव के स्तर पर अच्छा प्रभाव डाल सकते हैं।

गर्भवती महिला को परिवार का साथ और भावनात्मक सहयोग मिलना उसकी मानसिक सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

5. पर्याप्त आराम करें

गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसलिए पर्याप्त आराम और अच्छी नींद बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार आराम करने से शरीर को रिकवरी का समय मिलता है और मानसिक तनाव भी कम होता है। हालांकि पूरी तरह निष्क्रिय रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि भी जरूरी हो सकती है।

6. हल्की तेल मालिश से मिल सकता है आराम

बालों, पैरों या शरीर की हल्की मालिश मांसपेशियों के तनाव को कम करने, आराम महसूस कराने और तनाव घटाने में मदद कर सकती है। हल्का स्पर्श शरीर की रिलैक्सेशन प्रतिक्रिया को सक्रिय कर सकता है।

यदि गर्भावस्था में कोई चिकित्सीय जटिलता हो या हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी हो, तो मालिश कराने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

क्या रखें ध्यान?

विशेषज्ञों का मानना है कि दादी-नानी की कई पारंपरिक सलाह अनुभव पर आधारित होती हैं और उनमें से कुछ का वैज्ञानिक समर्थन भी मिलता है। फिर भी हर गर्भावस्था अलग होती है। इसलिए किसी भी खानपान, दवा, सप्लीमेंट या घरेलू उपाय को अपनाने से पहले अपने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) से सलाह जरूर लें।

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Monsoon Footwear Tips: बारिश में जूतों को रखना है सुरक्षित, तो चुनें सही वाटरप्रूफ फुटवियर https://bharatsamwad.com/monsoon-footwear-tips-if-you-want-to-keep-your-shoes-safe-in-the-rain-then-choose-the-right-waterproof-footwear/ Wed, 08 Jul 2026 17:51:56 +0000 https://bharatsamwad.com/monsoon-footwear-tips-if-you-want-to-keep-your-shoes-safe-in-the-rain-then-choose-the-right-waterproof-footwear/

नई दिल्ली: देशभर में मानसून की बारिश के बीच जलभराव और कीचड़ के कारण लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मौसम में सामान्य जूते-चप्पल जल्दी खराब हो जाते हैं। खासकर चमड़े और कपड़े के जूते पानी में भीगने से बदबू, फंगस और नुकसान का शिकार हो सकते हैं।

ऐसे में विशेषज्ञ बारिश के मौसम में वाटरप्रूफ या वॉटर-रेजिस्टेंट मानसून फुटवियर पहनने की सलाह देते हैं। रबर सैंडल, वाटरप्रूफ चप्पल, स्लिप-रेजिस्टेंट सैंडल और हल्के मानसून शूज बारिश में बेहतर विकल्प माने जाते हैं। इनकी अच्छी ग्रिप फिसलन से बचाती है और ये जल्दी सूख भी जाते हैं।

मानसून फुटवियर का इस्तेमाल करने से रोजाना पहनने वाले जूतों की उम्र भी बढ़ती है। खरीदारी के समय केवल डिजाइन नहीं, बल्कि मटेरियल, साइज, आराम और ग्रिप पर भी ध्यान देना चाहिए। सही फुटवियर न सिर्फ पैरों को सुरक्षित रखता है, बल्कि बारिश में सफर को भी अधिक आरामदायक बनाता है।

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Monsoon Makeup Tips: बारिश में नहीं फैलेगा काजल और आईलाइनर, अपनाएं ये आसान टिप्स https://bharatsamwad.com/monsoon-makeup-tips-kajal-and-eyeliner-will-not-spread-in-the-rain-adopt-these-easy-tips/ Wed, 08 Jul 2026 17:43:32 +0000 https://bharatsamwad.com/monsoon-makeup-tips-kajal-and-eyeliner-will-not-spread-in-the-rain-adopt-these-easy-tips/

लाइफस्टाइल: बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं मेकअप को लंबे समय तक टिकाए रखना मुश्किल हो जाता है। खासकर काजल और आईलाइनर नमी, पसीने और बारिश के कारण जल्दी फैल जाते हैं। अगर आप मानसून में भी स्मज-फ्री आई मेकअप चाहती हैं, तो ये आसान टिप्स आपके काम आएंगे।

अपनाएं ये आसान टिप्स

  • वॉटरप्रूफ प्रोडक्ट चुनें: हमेशा वॉटरप्रूफ और लॉन्ग-लास्टिंग काजल व आईलाइनर का इस्तेमाल करें। ट्यूबिंग फॉर्मूला वाले प्रोडक्ट मानसून के लिए बेहतर विकल्प माने जाते हैं।
  • पलकों को रखें साफ और सूखा: मेकअप लगाने से पहले आंखों के आसपास की त्वचा को अच्छी तरह साफ और सूखा लें। इससे मेकअप ज्यादा देर तक टिका रहता है।
  • पतली लेयर लगाएं: काजल या आईलाइनर की मोटी लाइन लगाने के बजाय पहले पतली लेयर लगाएं। जरूरत होने पर सूखने के बाद दूसरी लेयर लगाएं।
  • आई प्राइमर का करें इस्तेमाल: ऑयली स्किन या ऑयली पलकों वाले लोग आई प्राइमर या हल्का ट्रांसलूसेंट पाउडर लगाएं। इससे मेकअप फैलने की संभावना कम होती है।
  • आंखों को बार-बार न रगड़ें: बारिश या पसीने की वजह से आंखों को रगड़ने से बचें। जरूरत पड़ने पर टिश्यू से हल्के हाथों से थपथपाकर नमी हटाएं।
  • दिन के अंत में मेकअप जरूर हटाएं: अच्छे मेकअप रिमूवर से काजल और आईलाइनर साफ करें, ताकि आंखों में जलन या संक्रमण का खतरा न रहे।

थोड़ी-सी सावधानी और सही मेकअप प्रोडक्ट के इस्तेमाल से आप मानसून में भी पूरे दिन फ्रेश और परफेक्ट आई मेकअप बनाए रख सकती हैं।

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40 की उम्र के बाद पुरुषों के लिए ये हेल्थ टेस्ट हैं बेहद जरूरी, समय रहते मिल सकती है गंभीर बीमारियों से राहत https://bharatsamwad.com/these-health-tests-are-very-important-for-men-after-the-age-of-40-they-can-get-relief-from-serious-diseases-in-time/ Tue, 07 Jul 2026 07:54:48 +0000 https://bharatsamwad.com/these-health-tests-are-very-important-for-men-after-the-age-of-40-they-can-get-relief-from-serious-diseases-in-time/

लाइफस्टाइल: 40 वर्ष की उम्र पार करने के बाद पुरुषों को अपनी सेहत के प्रति पहले से अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है। इस उम्र में शरीर की कार्यप्रणाली में धीरे-धीरे बदलाव आने लगते हैं और कई गंभीर बीमारियां शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित हो सकती हैं। ऐसे में नियमित हेल्थ चेकअप न केवल बीमारियों का समय पर पता लगाने में मदद करता है, बल्कि समय रहते इलाज शुरू करने का भी अवसर देता है।

1. ब्लड प्रेशर की नियमित जांच
उम्र बढ़ने के साथ धमनियां सख्त होने लगती हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। हाई ब्लड प्रेशर को “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि यह अक्सर बिना किसी लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराना बेहद जरूरी है।

2. लिपिड प्रोफाइल टेस्ट
यह जांच शरीर में गुड (HDL) और बैड (LDL) कोलेस्ट्रॉल के स्तर का पता लगाती है। यदि बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ हो, तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक और धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ सकता है।

3. डायबिटीज स्क्रीनिंग
40 की उम्र के बाद मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है, जिससे ब्लड शुगर प्रभावित हो सकती है। फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट से वर्तमान और पिछले तीन महीनों के औसत शुगर स्तर का पता चलता है। जिन लोगों के परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, उन्हें नियमित रूप से यह जांच करानी चाहिए।

4. प्रोस्टेट की जांच
बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार बढ़ सकता है, जिससे पेशाब से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। डॉक्टर की सलाह पर PSA (Prostate-Specific Antigen) टेस्ट कराया जा सकता है। हालांकि केवल PSA टेस्ट से प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि नहीं होती, लेकिन यह आगे की जांच की आवश्यकता का संकेत दे सकता है।

5. विटामिन-डी और कैल्शियम टेस्ट
विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर इनकी जांच और सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं।

6. CBC, लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट

  • CBC (Complete Blood Count): खून की कमी, संक्रमण और अन्य रक्त संबंधी समस्याओं की जानकारी देता है।
  • LFT (Liver Function Test): लिवर की कार्यक्षमता का आकलन करता है।
  • KFT (Kidney Function Test): किडनी की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य की जांच के लिए किया जाता है।

स्वस्थ जीवनशैली भी है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान, शराब का अधिक सेवन, असंतुलित खानपान, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देते हैं। इसलिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और समय-समय पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार हेल्थ चेकअप कराना 40 की उम्र के बाद स्वस्थ जीवन के लिए बेहद जरूरी है।

नोट: कौन-कौन से टेस्ट और कितनी बार कराने चाहिए, यह आपकी उम्र, पारिवारिक इतिहास, जीवनशैली और पहले से मौजूद बीमारियों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी जांच से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

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बारिश में मच्छरों से बचने के आसान घरेलू उपाय, बिना धुएं और केमिकल के मिलेगा राहत https://bharatsamwad.com/easy-home-remedies-to-avoid-mosquitoes-in-rain-you-will-get-relief-without-smoke-and-chemicals/ Tue, 07 Jul 2026 07:42:45 +0000 https://bharatsamwad.com/easy-home-remedies-to-avoid-mosquitoes-in-rain-you-will-get-relief-without-smoke-and-chemicals/

बारिश का मौसम आते ही मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है। इसके साथ ही डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। मच्छरों से बचाव के लिए कई लोग कॉइल और लिक्विड रिपेलेंट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनसे निकलने वाला धुआं बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में कुछ आसान और प्राकृतिक घरेलू उपाय अपनाकर भी मच्छरों को काफी हद तक दूर रखा जा सकता है।

नीम और कपूर का मिश्रण
नीम के तेल में प्राकृतिक रूप से मच्छरों को दूर रखने वाले गुण पाए जाते हैं। इसमें थोड़ा कपूर मिलाकर शाम के समय दीया या डिफ्यूजर में इस्तेमाल करने से इसकी गंध मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती है। यह तरीका रासायनिक रिपेलेंट की तुलना में अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।

नींबू और लौंग का उपाय
एक नींबू को आधा काटकर उसमें 8–10 लौंग लगा दें और इसे कमरे के कोनों या खिड़कियों के पास रख दें। नींबू और लौंग की तेज खुशबू मच्छरों को दूर रखने में सहायक मानी जाती है। यह उपाय बिना धुएं के इस्तेमाल किया जा सकता है।

लहसुन के पानी का स्प्रे
लहसुन की कुछ कलियों को पानी में उबाल लें। ठंडा होने के बाद इस पानी को स्प्रे बोतल में भरकर घर के अंधेरे कोनों, बालकनी या उन जगहों पर छिड़कें जहां मच्छर अधिक आते हैं। लहसुन की तीखी गंध मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकती है।

इन सावधानियों का भी रखें ध्यान

  • घर, छत, कूलर, गमलों और अन्य बर्तनों में पानी जमा न होने दें।
  • सप्ताह में कम से कम एक बार कूलर और पानी के बर्तनों की सफाई करें।
  • शाम के समय खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें या मच्छरदानी/जाली का इस्तेमाल करें।
  • बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं ताकि मच्छरों के काटने का खतरा कम हो।
  • रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।

ध्यान रखें
घरेलू उपाय मच्छरों को कम करने में कुछ हद तक मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें डेंगू या मलेरिया से बचाव का पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध विकल्प नहीं माना जाता। सबसे प्रभावी बचाव है कि मच्छरों को पनपने से रोका जाए और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा सुझाए गए सुरक्षित मच्छररोधी उपाय अपनाए जाएं। यदि तेज बुखार, शरीर में दर्द या डेंगू-मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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Mango Pickle Recipe: घर पर बनाएं स्वादिष्ट आम का अचार, इन आसान टिप्स से महीनों तक नहीं होगा खराब https://bharatsamwad.com/mango-pickle-recipe-make-delicious-mango-pickle-at-home-and-it-will-not-spoil-for-months-with-these-easy-tips/ Sun, 05 Jul 2026 16:39:31 +0000 https://bharatsamwad.com/mango-pickle-recipe-make-delicious-mango-pickle-at-home-and-it-will-not-spoil-for-months-with-these-easy-tips/

भारतीय खाने में आम का अचार स्वाद का ऐसा तड़का है, जो साधारण भोजन को भी खास बना देता है। दाल-चावल, पराठा, पूरी या रोटी के साथ इसका स्वाद हर किसी को पसंद आता है। लेकिन कई बार घर पर बनाया गया अचार कुछ ही दिनों में खराब होने लगता है या उसमें फंगस लग जाती है। यदि अचार बनाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए, तो यह लंबे समय तक सुरक्षित और स्वादिष्ट बना रह सकता है।

अच्छी गुणवत्ता वाले कच्चे आम चुनें

स्वादिष्ट और टिकाऊ अचार बनाने के लिए सबसे पहले ताजे और सख्त कच्चे आम का चयन करें। आम को अच्छी तरह धोने के बाद साफ कपड़े से पोंछकर पूरी तरह सुखा लें। ध्यान रखें कि आम पर जरा भी नमी न हो, क्योंकि यही अचार खराब होने की सबसे बड़ी वजह बनती है।

इसके बाद आम को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उन पर थोड़ा नमक छिड़क दें और कुछ घंटों तक धूप में रखें। इससे आम का अतिरिक्त पानी निकल जाता है, जिससे अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।

मसालों का सही संतुलन बढ़ाएगा स्वाद

आम के टुकड़ों में हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, सौंफ, मेथी दाना, कलौंजी, धनिया पाउडर, हींग, नमक और स्वादानुसार गरम मसाला मिलाएं। सभी मसालों को अच्छी तरह मिलाएं ताकि हर टुकड़ा समान रूप से मसालों से ढक जाए। सही मात्रा में मसाले अचार का स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ाते हैं।

सरसों का तेल है सबसे जरूरी

आम के अचार में सरसों का तेल न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि प्राकृतिक प्रिजर्वेटिव का भी काम करता है। तेल को पहले अच्छी तरह गर्म करें और पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही मसालेदार आम में मिलाएं। इससे अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और उसका स्वाद भी बेहतर हो जाता है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

अचार को अधिक समय तक सुरक्षित रखने के लिए चाहें तो इसमें थोड़ा नींबू का रस भी मिला सकते हैं। तैयार अचार को हमेशा साफ और पूरी तरह सूखे कांच के जार में भरें। जार का ढक्कन अच्छी तरह बंद रखें और उसे नमी वाली जगह पर रखने से बचें।

अचार तैयार होने के बाद करीब 10 दिनों तक इसे रख दें। इस दौरान बीच-बीच में केवल सूखे और साफ चम्मच से हल्का-सा चलाते रहें ताकि मसाले और तेल अच्छी तरह मिलते रहें। लगभग 10 दिन बाद अचार खाने के लिए तैयार हो जाएगा और समय के साथ इसका स्वाद और भी निखर जाएगा।

अचार को खराब होने से बचाने के आसान टिप्स

  • अचार बनाते समय पानी या नमी बिल्कुल न रहने दें।
  • हमेशा सूखे और साफ बर्तनों का इस्तेमाल करें।
  • कांच के जार का उपयोग करें और उसे अच्छी तरह बंद रखें।
  • अचार निकालते समय केवल सूखा चम्मच ही इस्तेमाल करें।
  • जार को धूप या नमी वाली जगह पर रखने से बचें।

इन आसान उपायों को अपनाकर आप घर पर ऐसा आम का अचार तैयार कर सकते हैं, जो लंबे समय तक ताजा, स्वादिष्ट और सुरक्षित बना रहेगा।

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15–20 मिनट में बनाएं टेस्टी मिनी पिज्जा बाइट्स, बच्चों से लेकर बड़ों तक आएंगे पसंद https://bharatsamwad.com/make-tasty-mini-pizza-bites-in-15-20-minutes-kids-and-adults-will-love-it/ Sat, 04 Jul 2026 09:28:07 +0000 https://bharatsamwad.com/make-tasty-mini-pizza-bites-in-15-20-minutes-kids-and-adults-will-love-it/

शाम के समय हल्की भूख लगने पर अक्सर कुछ चटपटा और स्वादिष्ट खाने का मन करता है। ऐसे में हर बार बाहर से महंगा पिज्जा मंगाना संभव नहीं होता। यदि आप कम समय में घर पर ही पिज्जा जैसा स्वाद चाहते हैं, तो मिनी पिज्जा बाइट्स एक बेहतरीन विकल्प हैं। यह रेसिपी साधारण ब्रेड और कुछ बेसिक सामग्री से सिर्फ 15–20 मिनट में तैयार हो जाती है।

इस स्नैक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे तवे या ओवन, दोनों में आसानी से बनाया जा सकता है। बाहर से क्रिस्पी और अंदर से चीज़ी होने की वजह से यह बच्चों और बड़ों, दोनों को बेहद पसंद आता है। साथ ही, इसमें सब्जियों और चीज़ का संतुलित उपयोग होने से यह बाजार के तले-भुने स्नैक्स की तुलना में बेहतर विकल्प माना जाता है।

सामग्री

  • 6–8 ब्रेड स्लाइस या मिनी पिज्जा बेस
  • 4–5 चम्मच पिज्जा सॉस
  • 1 कप मोजरेला चीज़ (कद्दूकस किया हुआ)
  • ½ कप शिमला मिर्च (बारीक कटी हुई)
  • ½ कप प्याज (बारीक कटा हुआ)
  • ½ कप टमाटर (बीज निकालकर बारीक कटे हुए)
  • 3–4 चम्मच उबले हुए स्वीट कॉर्न
  • 1 चम्मच ऑरिगेनो
  • 1 चम्मच चिली फ्लेक्स
  • 2–3 चम्मच बटर

बनाने की विधि

  1. सबसे पहले ब्रेड स्लाइस को गोल आकार में काट लें।
  2. प्रत्येक स्लाइस पर पिज्जा सॉस की एक पतली परत लगाएं।
  3. इसके ऊपर शिमला मिर्च, प्याज, टमाटर और कॉर्न समान रूप से फैलाएं।
  4. अब ऊपर से भरपूर मात्रा में मोजरेला चीज़ डालें।
  5. ऑरिगेनो और चिली फ्लेक्स छिड़कें।
  6. तवे पर हल्का बटर लगाकर धीमी आंच पर ढककर 5–7 मिनट तक पकाएं, जब तक चीज़ अच्छी तरह पिघल न जाए और ब्रेड नीचे से सुनहरी व क्रिस्पी न हो जाए।
  7. यदि ओवन का उपयोग कर रहे हैं, तो 180°C पर 8–10 मिनट तक बेक करें।

परोसने का तरीका

गरमा-गरम मिनी पिज्जा बाइट्स को टोमैटो केचप, चिली सॉस या अपनी पसंदीदा डिप के साथ परोसें। यह बच्चों के टिफिन, शाम की चाय या अचानक आने वाले मेहमानों के लिए भी एक बेहतरीन और झटपट तैयार होने वाला स्नैक है।

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बजट में फिटनेस के लिए बेहतर विकल्प बने Campus स्पोर्ट्स शूज, कीमत 1000 रुपये से कम https://bharatsamwad.com/campus-sports-shoes-become-a-better-option-for-fitness-in-budget-price-less-than-rs-1000/ Thu, 02 Jul 2026 15:46:44 +0000 https://bharatsamwad.com/campus-sports-shoes-become-a-better-option-for-fitness-in-budget-price-less-than-rs-1000/

अगर आप जिम, रनिंग या रोजाना वॉक के लिए किफायती और आरामदायक स्पोर्ट्स शूज की तलाश में हैं, तो Campus ब्रांड के स्पोर्ट्स शूज एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। हल्के वजन और आरामदायक डिजाइन के कारण ये लंबे समय तक पहनने पर भी पैरों पर कम दबाव डालते हैं और बेहतर सपोर्ट प्रदान करते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Campus के कई स्पोर्ट्स शूज 1000 रुपये से कम शुरुआती कीमत में उपलब्ध हैं। इनमें अच्छी ग्रिप, कुशनिंग और स्थिरता जैसे फीचर्स मिलते हैं, जो जिम और रनिंग के दौरान बेहतर प्रदर्शन में मदद करते हैं। इन्हें विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से भी आसानी से खरीदा जा सकता है।

फिटनेस विशेषज्ञों का कहना है कि स्पोर्ट्स शूज खरीदते समय केवल कीमत नहीं, बल्कि कंफर्ट, ग्रिप, कुशनिंग और फुट सपोर्ट को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। सही जूते न सिर्फ प्रदर्शन बेहतर बनाते हैं, बल्कि पैरों और जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम कर चोट के जोखिम को भी घटाते हैं। ऐसे में बजट सेगमेंट में Campus स्पोर्ट्स शूज फिटनेस पसंद करने वालों के लिए एक बेहतर विकल्प माने जा रहे हैं।

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मसूड़ों में सूजन या दांत टूट रहे हैं? यह सिर्फ डेंटल नहीं—हड्डियों की बीमारी का भी हो सकता है संकेत https://bharatsamwad.com/swollen-gums-or-crumbling-teeth-its-not-just-dental-it-could-also-be-a-sign-of-bone-disease/ Sat, 18 Oct 2025 11:12:21 +0000 https://bharatsamwad.com/?p=20705

अक्सर हम दांतों में दर्द, मसूड़ों की सूजन या दांत टूटने जैसी समस्याओं को मामूली मानकर अनदेखा कर देते हैं। बहुत से लोग इसे बढ़ती उम्र या डेंटल हाइजीन की कमी से जोड़ते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये परेशानी आपकी हड्डियों के कमजोर होने का भी संकेत हो सकती है?

हर साल 20 अक्टूबर को “वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे” मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके। ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की हड्डियाँ धीरे-धीरे अपना घनत्व खोने लगती हैं और कमजोर हो जाती हैं। यही असर जबड़े की हड्डी पर भी पड़ता है — जो हमारे दाँतों को थामे रखती है।

जबड़े की हड्डी कमजोर होने लगती है

जब शरीर में कैल्शियम और मिनरल की कमी होती है, तो जबड़े की हड्डी पतली और नाजुक हो जाती है। इससे दांतों की जड़ें हड्डी में ठीक से टिक नहीं पातीं और दांत ढीले या टूटने लगते हैं। यह ऑस्टियोपोरोसिस का शुरुआती संकेत हो सकता है, जिसे नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए।

मसूड़े पीछे हटने लगते हैं

जब जबड़े की हड्डी अपना सहारा खो देती है, तो मसूड़े भी धीरे-धीरे नीचे की ओर खिसकने लगते हैं। इस स्थिति को “गम रिसेशन” कहा जाता है। इससे दांतों की जड़ें बाहर दिखने लगती हैं और ठंडा-गर्म लगना या संक्रमण जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं।

डेन्चर पहनने वालों को भी परेशानी

जिन लोगों के दांत पहले से टूट चुके हैं और जो डेन्चर (कृत्रिम दांत) लगाते हैं, उनके लिए भी ऑस्टियोपोरोसिस समस्या का कारण बन सकता है। जबड़े की हड्डी के कमजोर होने से डेन्चर ठीक से फिट नहीं बैठता और बार-बार ढीला हो जाता है — यह हड्डियों के नुकसान का संकेत है।

क्या करें?

अपने भोजन में कैल्शियम, विटामिन D और विटामिन K2 से भरपूर चीजें शामिल करें।

नियमित रूप से वजन उठाने वाले एक्सरसाइज करें।

धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखें।

समय-समय पर डेंटल चेकअप कराते रहें और डॉक्टर से अपनी हड्डियों के स्वास्थ्य पर चर्चा करें।

याद रखें

दांतों और मसूड़ों की बार-बार होने वाली समस्या सिर्फ डेंटल नहीं, बल्कि ऑस्टियोपोरोसिस का शुरुआती संकेत भी हो सकती है। समय पर जांच और सही उपचार से न सिर्फ आपके दांत, बल्कि आपकी पूरी हड्डी प्रणाली को मजबूत बनाए रखा जा सकता है।

(साभार)

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