Health – Bharat Samwad https://bharatsamwad.com National News Portal Sun, 07 Jun 2026 06:24:15 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 https://bharatsamwad.com/wp-content/uploads/2024/01/cropped-Bharat-Samwad-512x512-1-32x32.png Health – Bharat Samwad https://bharatsamwad.com 32 32 क्या घंटों कुर्सी पर बैठे रहना बन रहा है हार्ट अटैक की वजह? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ https://bharatsamwad.com/is-sitting-in-a-chair-for-hours-causing-heart-attacks-find-out-what-experts-say/ Sun, 07 Jun 2026 06:24:15 +0000 https://bharatsamwad.com/is-sitting-in-a-chair-for-hours-causing-heart-attacks-find-out-what-experts-say/

बदलती जीवनशैली और बढ़ते काम के दबाव के बीच हृदय रोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि अब कम उम्र के लोग भी हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ खराब खानपान या तनाव ही नहीं, बल्कि घंटों तक लगातार बैठे रहने की आदत भी एक बड़ा कारण बनकर उभरी है।

साइलेंट खतरा बन रही है निष्क्रिय जीवनशैली

आज के दौर में बड़ी संख्या में लोग ऑफिस, घर या अन्य कार्यस्थलों पर कई घंटे लगातार बैठकर काम करते हैं। कंप्यूटर और लैपटॉप के सामने बिताया जाने वाला लंबा समय शरीर की गतिविधियों को सीमित कर देता है, जिसका सीधा असर हृदय स्वास्थ्य पर पड़ता है।

हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर में रक्त संचार की गति धीमी हो जाती है। इससे ब्लड क्लॉट बनने, मोटापा बढ़ने और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। समय के साथ ये समस्याएं धमनियों को नुकसान पहुंचाती हैं और हार्ट अटैक तथा स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका बढ़ा देती हैं।

युवाओं में बढ़ रहा है जोखिम

विशेषज्ञ बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में युवाओं में हृदय संबंधी समस्याओं के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसका एक प्रमुख कारण शारीरिक गतिविधियों में कमी और लंबे समय तक निष्क्रिय रहना है।

कार्डियोलॉजिस्टों का कहना है कि स्वस्थ भोजन और धूम्रपान से दूरी बनाए रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी नियमित रूप से शरीर को सक्रिय रखना भी है। लगातार बैठे रहने से ब्लड शुगर का स्तर प्रभावित होता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है, जो हृदय रोगों का खतरा बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है।

काम के दौरान अपनाएं ये आसान उपाय

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि आपका काम लंबे समय तक बैठकर करने वाला है, तो हर 30 से 40 मिनट में कुछ मिनट के लिए सीट से उठें और टहलें। सीढ़ियों का इस्तेमाल करें, हल्की स्ट्रेचिंग करें या कुछ स्क्वैट्स लगाएं। इससे शरीर में रक्त संचार बेहतर बना रहता है।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

डॉक्टरों के मुताबिक हृदय को मजबूत बनाए रखने के लिए रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट तक वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए। इसके अलावा धूम्रपान और शराब से दूरी, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार भी बेहद जरूरी हैं।

फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माने जाते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हार्ट अटैक समेत कई गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या के लिए चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें।

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दिनभर नींद और थकान से हैं परेशान? जानिए क्या है इसकी असली वजह https://bharatsamwad.com/troubled-by-sleepiness-and-fatigue-all-day-long-find-out-the-real-reason-behind-it/ Thu, 04 Jun 2026 07:26:00 +0000 https://bharatsamwad.com/troubled-by-sleepiness-and-fatigue-all-day-long-find-out-the-real-reason-behind-it/

दिनभर सुस्ती, काम में मन न लगना और बार-बार नींद आना आजकल कई लोगों की आम समस्या बन चुकी है। अक्सर लोग इसे व्यस्त दिनचर्या, बढ़ते काम के दबाव या मौसम में बदलाव का असर मानकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन अगर पर्याप्त आराम करने के बाद भी शरीर में ऊर्जा की कमी बनी रहती है, तो यह किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या खराब जीवनशैली का संकेत हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार थकान और नींद महसूस होना शरीर द्वारा दिया जाने वाला एक महत्वपूर्ण संकेत है। ऐसे लक्षणों को समय रहते समझना और उनके पीछे की वजह जानना जरूरी है, ताकि भविष्य में होने वाली गंभीर परेशानियों से बचा जा सके। आइए जानते हैं कि आखिर किन कारणों से दिनभर थकान और नींद की समस्या बनी रहती है।

क्यों महसूस होती है लगातार थकान और नींद?

1. नींद पूरी न होना
शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए पर्याप्त नींद बेहद जरूरी है। लगातार कम सोने से शरीर की रिकवरी प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे पूरे दिन सुस्ती और थकान बनी रह सकती है।

2. पोषण की कमी
शरीर में आयरन, विटामिन बी12, विटामिन डी और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी होने पर कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे में व्यक्ति जल्दी थक जाता है और उसे बार-बार आराम करने की जरूरत महसूस होती है।

3. मानसिक तनाव
लगातार तनाव, चिंता या मानसिक दबाव भी शरीर की ऊर्जा को प्रभावित करता है। तनाव के कारण नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है, जिससे पर्याप्त आराम मिलने के बावजूद थकान बनी रहती है।

4. शरीर में पानी की कमी
कम पानी पीने से शरीर डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकता है। इससे सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर और लगातार थकान जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।

5. शारीरिक गतिविधियों का अभाव
यदि दिनभर बैठकर काम किया जाता है और नियमित व्यायाम नहीं किया जाता, तो शरीर का ऊर्जा स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। सक्रिय जीवनशैली शरीर को चुस्त और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करती है।

6. स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां
कुछ मामलों में थायरॉइड की समस्या, एनीमिया, डायबिटीज, स्लीप एपनिया या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी अत्यधिक थकान और नींद आने का कारण बन सकती हैं।

थकान और सुस्ती से बचने के आसान उपाय

• नियमित और पर्याप्त नींद लें
हर दिन एक तय समय पर सोने और जागने की आदत बनाएं। अच्छी नींद शरीर को तरोताजा रखने में मदद करती है।

• पौष्टिक भोजन करें
अपने आहार में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें, ताकि शरीर को आवश्यक पोषण मिल सके।

• पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
दिनभर पर्याप्त पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और ऊर्जा स्तर बेहतर बना रहता है।

• रोजाना व्यायाम करें
हल्की वॉक, योग या किसी भी प्रकार की नियमित शारीरिक गतिविधि थकान को कम करने और शरीर को सक्रिय रखने में मदद करती है।

• तनाव प्रबंधन पर ध्यान दें
मेडिटेशन, योग और मनपसंद गतिविधियों के जरिए मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है, जिससे नींद और ऊर्जा दोनों में सुधार होता है।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लगातार बने रहने पर विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी- तंबाकू की आदत बना सकती है कई जानलेवा बीमारियों का शिकार https://bharatsamwad.com/health-experts-warning-the-tobacco-habit-can-make-you-a-victim-of-several-life-threatening-diseases/ Mon, 01 Jun 2026 09:33:29 +0000 https://bharatsamwad.com/health-experts-warning-the-tobacco-habit-can-make-you-a-victim-of-several-life-threatening-diseases/

तंबाकू और धूम्रपान आज दुनिया के सामने एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बने हुए हैं। जागरूकता अभियानों और स्वास्थ्य चेतावनियों के बावजूद करोड़ों लोग सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू न केवल कैंसर जैसी घातक बीमारी का कारण बनता है, बल्कि यह शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करता है।

स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार तंबाकू के सेवन से दुनिया भर में प्रतिवर्ष 80 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की भी है जो स्वयं धूम्रपान नहीं करते, लेकिन दूसरों के धुएं के संपर्क में आने के कारण गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू से होने वाली अधिकांश मौतों को जागरूकता और समय पर नशा छोड़ने के प्रयासों के जरिए रोका जा सकता है।

शरीर के लगभग हर अंग को पहुंचता है नुकसान

चिकित्सकों के मुताबिक धूम्रपान का असर केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव हृदय, मस्तिष्क, रक्त वाहिकाओं, मुंह, गले और पाचन तंत्र सहित पूरे शरीर पर पड़ता है। लंबे समय तक तंबाकू का सेवन करने वालों में फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और सीओपीडी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। वहीं निकोटीन की लत व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से इस कदर प्रभावित करती है कि नुकसान जानने के बावजूद इससे दूरी बनाना मुश्किल हो जाता है।

तंबाकू छोड़ने के तुरंत बाद दिखने लगते हैं फायदे

विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू छोड़ने के लिए कोई निश्चित उम्र नहीं होती। किसी भी समय लिया गया यह फैसला स्वास्थ्य के लिए लाभदायक साबित होता है। धूम्रपान छोड़ने के कुछ घंटों बाद ही रक्तचाप और हृदय गति सामान्य होने लगती है। शरीर में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर कम होता है और समय के साथ फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार देखा जाता है। लंबे समय में हार्ट अटैक और कैंसर का जोखिम भी कम हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि निकोटीन की लत मस्तिष्क में ऐसे बदलाव पैदा करती है, जिससे व्यक्ति की खुशी और संतुष्टि धीरे-धीरे नशे पर निर्भर होने लगती है। इस कारण तंबाकू छोड़ने के दौरान बेचैनी और तलब महसूस हो सकती है। ऐसे समय में नियमित व्यायाम, विशेष रूप से कार्डियो एक्सरसाइज, तनाव कम करने और लत से छुटकारा पाने में मददगार साबित हो सकती है।

प्रजनन क्षमता और त्वचा पर भी पड़ता है प्रभाव

धूम्रपान पुरुषों और महिलाओं दोनों के प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं में अंडों की गुणवत्ता और पुरुषों में शुक्राणुओं की क्षमता पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा लगातार धूम्रपान करने से त्वचा पर उम्र बढ़ने के लक्षण जल्दी दिखाई देने लगते हैं, जिससे व्यक्ति समय से पहले बूढ़ा नजर आने लगता है।

धूम्रपान छोड़ने में मददगार है 4D फॉर्मूला

तंबाकू छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए विशेषज्ञ 4D फॉर्मूला अपनाने की सलाह देते हैं—

Delay (देरी करें): सिगरेट पीने की इच्छा होने पर कम से कम 10 मिनट तक इंतजार करें।
Deep Breathing (गहरी सांस लें): गहरी सांस लेने से तनाव कम होता है और तलब नियंत्रित होती है।
Drink Water (पानी पिएं): पर्याप्त पानी पीने से शरीर को निकोटीन छोड़ने की प्रक्रिया में मदद मिलती है।
Do Something Else (कुछ और करें): टहलना, संगीत सुनना या किसी से बातचीत करना ध्यान भटकाने में सहायक हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू छोड़ना केवल जीवन को लंबा नहीं बनाता, बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर करता है। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाना सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

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गंदे कूलर पैड्स बन सकते हैं बीमारियों की वजह, जानिए कैसे रखें खुद को सुरक्षित https://bharatsamwad.com/dirty-cooler-pads-can-cause-illnesses-learn-how-to-keep-yourself-safe/ Wed, 27 May 2026 07:21:29 +0000 https://bharatsamwad.com/dirty-cooler-pads-can-cause-illnesses-learn-how-to-keep-yourself-safe/

गर्मी के दिनों में राहत पाने के लिए ज्यादातर घरों में कूलर का इस्तेमाल किया जाता है। तेज गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच कूलर कम खर्च में ठंडी हवा देने का अच्छा विकल्प माना जाता है। लेकिन अगर इसकी समय-समय पर सफाई न की जाए, तो यही कूलर स्वास्थ्य के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। खासकर कूलर के गंदे पैड्स हवा के साथ धूल, बैक्टीरिया और फंगस फैलाकर कई बीमारियों को बढ़ावा दे सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बिना साफ किए इस्तेमाल किए जाने वाले कूलर में नमी के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपने लगते हैं। जब कूलर चलता है तो ये दूषित कण हवा के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं, जिससे सांस संबंधी समस्याएं और एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर इसका असर ज्यादा देखने को मिलता है।

गंदे कूलर पैड्स से निकलने वाली हवा कई बार खांसी, जुकाम, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसके अलावा फंगस और धूल के कारण आंखों में जलन, त्वचा पर खुजली और एलर्जी जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। कई बार कूलर से बदबूदार हवा आने लगती है, जिससे कमरे का वातावरण असहज हो जाता है और सिरदर्द या बेचैनी महसूस हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कूलर की टंकी में जमा गंदा पानी भी संक्रमण फैलाने का कारण बन सकता है। दूषित पानी में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं, जो हवा के माध्यम से शरीर में पहुंचकर बुखार और अन्य संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए गर्मियों में कूलर की नियमित सफाई बेहद जरूरी मानी जाती है।

कूलर को सुरक्षित और स्वच्छ बनाए रखने के लिए हर दो से तीन दिन में पानी बदलना चाहिए। साथ ही कूलर पैड्स और टंकी की नियमित सफाई करनी चाहिए। कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि ताजी हवा आती रहे। जरूरत पड़ने पर एंटी-बैक्टीरियल लिक्विड का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी अपनाकर कूलर को न केवल लंबे समय तक बेहतर रखा जा सकता है, बल्कि परिवार को कई स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाया जा सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

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भीषण गर्मी में बढ़ रहा लो बीपी का खतरा, जानें अचानक ब्लड प्रेशर गिरने पर क्या करें https://bharatsamwad.com/the-risk-of-low-blood-pressure-is-rising-amidst-the-scorching-heat-learn-what-to-do-if-your-blood-pressure-suddenly-drops/ Sun, 24 May 2026 05:18:54 +0000 https://bharatsamwad.com/the-risk-of-low-blood-pressure-is-rising-amidst-the-scorching-heat-learn-what-to-do-if-your-blood-pressure-suddenly-drops/

देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर लगातार बढ़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच लोगों में डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी सिर्फ हीट स्ट्रोक ही नहीं, बल्कि लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन) का जोखिम भी बढ़ा सकती है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में शरीर को सामान्य तापमान पर बनाए रखने के लिए रक्त वाहिकाएं फैलने लगती हैं। इस प्रक्रिया के कारण कई लोगों का ब्लड प्रेशर सामान्य से नीचे जा सकता है। इसके अलावा लगातार पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, जिससे कमजोरी, चक्कर और बेहोशी जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि लो ब्लड प्रेशर की स्थिति में व्यक्ति को अचानक उठने-बैठने में परेशानी हो सकती है। कई बार आंखों के सामने अंधेरा छाना, शरीर में अत्यधिक थकान महसूस होना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई भी इसके संकेत हो सकते हैं। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो इसका असर हृदय, मस्तिष्क और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर भी पड़ सकता है।

गर्मियों में लो बीपी क्यों होता है?

गर्म मौसम में शरीर से अधिक मात्रा में पसीना निकलता है, जिससे पानी के साथ सोडियम और पोटैशियम जैसे आवश्यक खनिज भी कम हो जाते हैं। यही कारण है कि शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बिगड़ने लगता है और ब्लड प्रेशर गिर सकता है। लंबे समय तक धूप में रहने, पर्याप्त पानी न पीने और भोजन छोड़ने की आदत भी इस समस्या को बढ़ा सकती है।

लो बीपी होने पर क्या करें?

अगर किसी व्यक्ति को अचानक चक्कर आने, कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस हो तो सबसे पहले उसका ब्लड प्रेशर जांचना चाहिए। यदि बीपी सामान्य से कम हो तो उसे आरामदायक स्थिति में लिटाकर पैरों को थोड़ा ऊंचा रखें। इससे रक्त का प्रवाह मस्तिष्क तक बेहतर तरीके से पहुंच पाता है।

इसके अलावा शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करने के लिए ओआरएस घोल, नारियल पानी या नमक-चीनी वाला पेय दिया जा सकता है। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना और शरीर को ठंडे वातावरण में रखना भी राहत पहुंचा सकता है।

किन बातों का रखें ध्यान?

लो ब्लड प्रेशर की स्थिति में व्यक्ति को अचानक खड़ा होने या तेजी से चलने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गिरने या बेहोश होने का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक खाली पेट रहने से भी बीपी कम हो सकता है, इसलिए समय-समय पर हल्का और पौष्टिक भोजन लेना जरूरी है।

यदि लो बीपी के साथ सांस लेने में परेशानी, बार-बार बेहोशी या स्थिति लगातार बिगड़ती नजर आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचाव करना और संतुलित आहार लेना इस समस्या से बचने के सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।

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स्वाद बढ़ाने वाली टोमैटो सॉस कहीं सेहत के लिए खतरा तो नहीं? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ https://bharatsamwad.com/is-flavor-enhancing-tomato-sauce-a-threat-to-your-health-find-out-what-experts-say/ Fri, 22 May 2026 10:14:29 +0000 https://bharatsamwad.com/is-flavor-enhancing-tomato-sauce-a-threat-to-your-health-find-out-what-experts-say/

बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, समोसा और चाउमीन जैसे फास्ट फूड के साथ टोमैटो सॉस का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। इसका खट्टा-मीठा स्वाद खाने का मजा बढ़ा देता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाली यह सॉस आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में मिलने वाली कई टोमैटो सॉस और केचप में टमाटर के अलावा चीनी, नमक, प्रिजर्वेटिव्स और कृत्रिम रंगों की मात्रा काफी अधिक हो सकती है, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

हापुड़ में नकली सॉस बनाने का मामला आया सामने

हाल ही में उत्तर प्रदेश के हापुड़ में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने एक स्थान पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में नकली टोमैटो सॉस बरामद की। जांच के दौरान अधिकारियों ने सैकड़ों बोतलें जब्त कीं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सॉस तैयार करने में गाजर, स्टार्च, अधिक मात्रा में चीनी, नमक, कृत्रिम रंग और अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार ऐसे उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

अधिक चीनी और नमक बढ़ा सकते हैं जोखिम

पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में उपलब्ध कई सॉस में चीनी और सोडियम की मात्रा अपेक्षा से ज्यादा होती है। नियमित रूप से अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा प्रोसेसिंग के दौरान मिलाए जाने वाले कुछ प्रिजर्वेटिव्स और फ्लेवरिंग एजेंट्स पाचन तंत्र को भी प्रभावित कर सकते हैं।

पाचन और एलर्जी की समस्या

विशेषज्ञों का मानना है कि कम गुणवत्ता वाले सॉस में मौजूद कृत्रिम रंग और रसायन कुछ लोगों में एलर्जी, पेट दर्द, गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे उत्पादों का सेवन शरीर में सूजन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी बढ़ा सकता है।

बच्चों की सेहत पर ज्यादा असर

बच्चों में टोमैटो सॉस का इस्तेमाल सबसे ज्यादा देखा जाता है। फ्राइज, बर्गर, पिज्जा और अन्य जंक फूड के साथ सॉस खाने की आदत उन्हें अधिक चीनी और नमक का आदी बना सकती है। इससे कम उम्र में ही वजन बढ़ना, ब्लड शुगर असंतुलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही यह आदत बच्चों को पौष्टिक भोजन से दूर भी कर सकती है।

सॉस खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सॉस खरीदते समय उसके लेबल को ध्यान से पढ़ें। ऐसे उत्पाद चुनें जिनमें टमाटर की मात्रा अधिक हो और अतिरिक्त चीनी, नमक तथा कृत्रिम प्रिजर्वेटिव्स कम हों। खुले में बिकने वाले या अत्यधिक चमकीले रंग वाले सॉस से बचना बेहतर है। यदि संभव हो तो घर पर तैयार की गई सॉस का इस्तेमाल अधिक सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प माना जाता है।

नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और उपलब्ध चिकित्सा रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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चाय के साथ सिगरेट पीना पड़ सकता है भारी, जान लीजिये इसके नुकसान https://bharatsamwad.com/smoking-a-cigarette-with-tea-can-prove-costly-learn-about-its-harmful-effects/ Thu, 21 May 2026 10:08:07 +0000 https://bharatsamwad.com/smoking-a-cigarette-with-tea-can-prove-costly-learn-about-its-harmful-effects/

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में चाय और सिगरेट का साथ कई लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। ऑफिस में काम के दबाव के बीच या दोस्तों के साथ बैठकों में लोग अक्सर चाय के साथ सिगरेट पीना पसंद करते हैं। खासकर युवाओं में इसे तनाव कम करने और रिलैक्स महसूस करने का आसान तरीका माना जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो यह आदत धीरे-धीरे शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

डॉक्टरों के अनुसार चाय में मौजूद कैफीन और सिगरेट में पाया जाने वाला निकोटिन मिलकर शरीर पर दोगुना असर डालते हैं। शुरुआत में यह कॉम्बिनेशन ताजगी और राहत का एहसास देता है, लेकिन लंबे समय में यह कई बीमारियों की वजह बन सकता है। आइए जानते हैं कि चाय और सिगरेट का एक साथ सेवन शरीर को किस तरह प्रभावित करता है।

दिल की सेहत पर बढ़ता है खतरा

सिगरेट में मौजूद निकोटिन दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है। वहीं चाय में मौजूद कैफीन भी शरीर को उत्तेजित करता है। दोनों का एक साथ सेवन करने से हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ सकता है।

फेफड़ों को होता है नुकसान

सिगरेट का धुआं फेफड़ों के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। लगातार धूम्रपान करने से सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों में सूजन और ऑक्सीजन क्षमता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। चाय के साथ सिगरेट पीने की आदत इस नुकसान को और बढ़ा देती है।

बढ़ सकती है लत

निकोटिन और कैफीन दोनों ही दिमाग के रसायनों को प्रभावित करते हैं। इससे व्यक्ति को बार-बार चाय और सिगरेट लेने की इच्छा होने लगती है। धीरे-धीरे यह आदत मानसिक और शारीरिक निर्भरता में बदल सकती है।

पाचन तंत्र पर पड़ता है असर

खाली पेट चाय और सिगरेट का सेवन पेट में एसिड की मात्रा बढ़ा सकता है। इससे गैस, एसिडिटी, पेट दर्द और जलन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लंबे समय तक ऐसा करने से पेट की अंदरूनी परत भी कमजोर हो सकती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

कई लोगों को लगता है कि चाय और सिगरेट तनाव कम करते हैं, लेकिन यह राहत कुछ समय के लिए ही होती है। निकोटिन और कैफीन का असर खत्म होने के बाद बेचैनी, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

नोट: यह जानकारी विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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क्या है डायरिया, गर्मियों में क्यों बढ़ जाते हैं इसके मामले? जानिए क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ https://bharatsamwad.com/what-is-diarrhea-and-why-do-cases-surge-during-the-summer-find-out-what-health-experts-have-to-say/ Mon, 18 May 2026 06:51:03 +0000 https://bharatsamwad.com/?p=24692

देशभर में भीषण गर्मी का असर अब लोगों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। तापमान लगातार बढ़ने के साथ पेट से जुड़ी बीमारियों के मामलों में तेजी आई है। अस्पतालों और क्लीनिकों में डायरिया, उल्टी, फूड पॉइजनिंग और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में खानपान और साफ-सफाई में थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है।

गर्मी के मौसम में शरीर से अधिक पसीना निकलने के कारण पानी की कमी जल्दी होने लगती है। ऐसे में दूषित पानी, खुले में बिकने वाला खाना और लंबे समय तक रखा बासी भोजन संक्रमण का खतरा बढ़ा देता है। यही कारण है कि इस मौसम में डायरिया के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसका खतरा अधिक माना जाता है।

क्या है डायरिया?
डायरिया यानी बार-बार पतले दस्त होना। यह आमतौर पर संक्रमित भोजन या गंदा पानी पीने से होता है। कई बार बैक्टीरिया, वायरस या खराब खानपान के कारण पाचन तंत्र प्रभावित हो जाता है, जिससे पेट खराब होने की समस्या शुरू हो जाती है। सड़क किनारे मिलने वाले कटे फल, खुला खाना और अस्वच्छ पेय पदार्थ इस संक्रमण का बड़ा कारण बनते हैं।

गर्मियों में क्यों बढ़ता है खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक गर्म तापमान में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं। खाना जल्दी खराब हो जाता है और उसमें संक्रमण पैदा होने लगता है। कई घंटे तक रखा भोजन, दूषित बर्फ और बिना ढका खाना पेट संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देता है। ई-कोलाई, साल्मोनेला और रोटावायरस जैसे संक्रमण डायरिया के प्रमुख कारण माने जाते हैं।

डायरिया के लक्षण
डायरिया की स्थिति में दिन में कई बार पतले दस्त होना सबसे सामान्य संकेत है। इसके अलावा पेट दर्द, ऐंठन, उल्टी, मतली, कमजोरी और हल्का बुखार भी हो सकता है। लगातार दस्त होने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है, जिससे चक्कर आना, मुंह सूखना और कमजोरी महसूस हो सकती है।

तुरंत क्या करें?
डॉक्टरों का कहना है कि डायरिया होने पर शरीर में पानी की कमी पूरी करना सबसे जरूरी होता है। ओआरएस का घोल पीना काफी फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी और अन्य तरल पदार्थ भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। मरीज को हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन देना चाहिए।

कैसे करें बचाव?
गर्मियों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। खाने से पहले और टॉयलेट के बाद साबुन से हाथ धोना चाहिए। हमेशा साफ और फिल्टर किया हुआ पानी पीना बेहतर माना जाता है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों और बासी खाने से बचना चाहिए।

नोट: यह जानकारी स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है।

(साभार)

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बार- बार छींक आना, नाक बहना सर्दी-जुकाम ही नहीं, ‘हे फीवर’ का भी हो सकता है संकेत https://bharatsamwad.com/frequent-sneezing-and-a-runny-nose-may-be-a-sign-not-only-of-a-common-cold-but-also-of-hay-fever/ Sun, 17 May 2026 04:35:13 +0000 https://bharatsamwad.com/?p=24672

मौसम में बदलाव होते ही अगर आपको लगातार छींक आना, नाक बहना या आंखों में खुजली जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं, तो इसे हल्के में लेने की गलती न करें। कई लोग इन लक्षणों को सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये एलर्जी से जुड़ी एक बीमारी ‘हे फीवर’ का संकेत भी हो सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण के कारण इस समस्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

Hay Fever यानी एलर्जिक राइनाइटिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली धूल, परागकण, फफूंदी या जानवरों के बाल जैसी सामान्य चीजों को खतरनाक मानकर प्रतिक्रिया देने लगती है। इसके कारण शरीर में एलर्जी संबंधी लक्षण दिखाई देने लगते हैं। मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई वायरल संक्रमण नहीं बल्कि एलर्जी से जुड़ी समस्या है, जो लंबे समय तक परेशान कर सकती है।

हे फीवर के लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम से काफी मिलते-जुलते हैं। इसमें बार-बार छींक आना, नाक बंद होना या बहना, आंखों में पानी आना और खुजली जैसी समस्याएं आम हैं। कुछ लोगों को गले में खराश, सिरदर्द और अत्यधिक थकान भी महसूस हो सकती है। जिन लोगों को अस्थमा की समस्या है, उनमें यह परेशानी सांस लेने में दिक्कत और खांसी को और बढ़ा सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि सामान्य सर्दी-जुकाम वायरस के कारण होता है और आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाता है, जबकि हे फीवर एलर्जी पैदा करने वाली चीजों के संपर्क में आने तक बना रह सकता है। वायरल फीवर में हल्का बुखार और शरीर दर्द भी होता है, लेकिन हे फीवर में आमतौर पर बुखार नहीं आता।

डॉक्टरों के अनुसार, हे फीवर से बचने का सबसे अच्छा तरीका एलर्जी पैदा करने वाले कारकों से दूरी बनाना है। मौसम बदलने के दौरान बाहर कम निकलना, घर की नियमित सफाई करना, धूल से बचाव रखना और बाहर से आने के बाद हाथ-मुंह धोना काफी फायदेमंद माना जाता है। अगर एलर्जी के कारण सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या लगातार लक्षण बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बार-बार होने वाली एलर्जी को नजरअंदाज करने के बजाय सही समय पर जांच और इलाज कराना जरूरी है, ताकि समस्या गंभीर रूप न ले सके।

नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है।

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किडनी स्टोन में बीयर पीना फायदेमंद या नुकसानदायक? जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर https://bharatsamwad.com/is-drinking-beer-beneficial-or-harmful-for-kidney-stones-find-out-what-doctors-say/ Sat, 16 May 2026 07:19:17 +0000 https://bharatsamwad.com/?p=24653

आजकल किडनी स्टोन यानी पथरी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह बीमारी जितनी आम होती जा रही है, उतनी ही इसके इलाज को लेकर गलतफहमियां भी फैल रही हैं। कई लोग मानते हैं कि बीयर पीने से पथरी जल्दी निकल जाती है और इसी वजह से दर्द होने पर लोग इसे घरेलू इलाज की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं। सोशल मीडिया पर भी इससे जुड़े कई दावे देखने को मिलते हैं, लेकिन डॉक्टरों की राय इससे अलग है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बीयर को किडनी स्टोन का इलाज मानना सही नहीं है। हालांकि यह पेशाब की मात्रा बढ़ा सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इससे पथरी खत्म हो जाती है। कई मामलों में यह फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान भी कर सकती है।

क्या सच में बीयर से निकल जाती है पथरी?

डॉक्टर बताते हैं कि बीयर डाययूरेटिक की तरह काम करती है, यानी इसे पीने से बार-बार पेशाब आता है। इसी कारण कुछ छोटे स्टोन यूरिन के जरिए बाहर निकल सकते हैं। लेकिन यह प्रक्रिया केवल छोटे आकार की पथरी तक सीमित हो सकती है। मेडिकल साइंस में बीयर को किडनी स्टोन का प्रमाणित इलाज नहीं माना गया है।

अल्कोहल बढ़ा सकता है जोखिम

विशेषज्ञों के मुताबिक, बीयर में मौजूद अल्कोहल शरीर में पानी की कमी पैदा कर सकता है। डिहाइड्रेशन की वजह से यूरिन गाढ़ा हो जाता है, जिससे नई पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है। ज्यादा शराब पीने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव भी पड़ता है, जो लंबे समय में नुकसानदायक साबित हो सकता है।

छोटे और बड़े स्टोन में होता है फर्क

डॉक्टरों का कहना है कि किडनी स्टोन का इलाज उसके आकार पर निर्भर करता है। लगभग 4 से 5 मिमी तक के छोटे स्टोन कई बार ज्यादा पानी पीने और दवाइयों की मदद से बाहर निकल सकते हैं। लेकिन बड़े स्टोन के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है, जिसमें लेजर थेरेपी या सर्जरी भी शामिल हो सकती है।

बचाव के लिए क्या करें?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किडनी स्टोन से बचने के लिए रोज पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। इसके अलावा ज्यादा नमक, जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और अत्यधिक शराब से दूरी बनानी चाहिए। संतुलित आहार और नियमित हेल्थ चेकअप भी किडनी को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

डॉक्टरों की अहम सलाह

यदि लगातार पेट या कमर में तेज दर्द, पेशाब में जलन या खून जैसी समस्या दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बिना मेडिकल सलाह के किसी घरेलू उपाय या शराब पर निर्भर रहना खतरे से खाली नहीं हो सकता। सही समय पर जांच और उपचार ही किडनी स्टोन से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

नोट: यह जानकारी मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार की गई है।

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