Health – Bharat Samwad https://bharatsamwad.com National News Portal Wed, 22 Jul 2026 09:59:57 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 https://bharatsamwad.com/wp-content/uploads/2024/01/cropped-Bharat-Samwad-512x512-1-32x32.png Health – Bharat Samwad https://bharatsamwad.com 32 32 कम उम्र में बढ़ रहा दिल की बीमारियों का खतरा, जानिए कौन-सी आदतें बन रही हैं वजह https://bharatsamwad.com/the-risk-of-heart-diseases-is-increasing-at-a-young-age-know-which-habits-are-becoming-the-reason/ Wed, 22 Jul 2026 09:59:57 +0000 https://bharatsamwad.com/the-risk-of-heart-diseases-is-increasing-at-a-young-age-know-which-habits-are-becoming-the-reason/

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हृदय रोग केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गए हैं। बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और बढ़ते तनाव के कारण कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और कार्डियक अरेस्ट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते दैनिक आदतों में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में युवाओं में हृदय संबंधी बीमारियां और तेजी से बढ़ सकती हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, आनुवंशिक कारणों के अलावा हमारी रोजमर्रा की कई गलत आदतें दिल को नुकसान पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। घंटों बैठे रहना, जंक फूड का अधिक सेवन, धूम्रपान, पर्याप्त नींद न लेना और शारीरिक गतिविधियों की कमी धीरे-धीरे हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ कम उम्र से ही हार्ट हेल्थ पर ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर में सबसे अधिक मौतें हृदय रोगों के कारण होती हैं। भारत में भी बदलती जीवनशैली, मोटापा, तनाव और डायबिटीज जैसी समस्याओं ने हृदय रोगों का खतरा बढ़ा दिया है। ऐसे में समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।

बढ़ रहा है हृदय रोगों का खतरा

विशेषज्ञ बताते हैं कि दिल पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने का काम करता है। लेकिन जब धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और फैट जमा होने लगता है या ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा रहता है, तो हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई बार ये समस्याएं लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती हैं।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के एक अध्ययन में भी सामने आया है कि भारत के अधिकांश वयस्कों में कोलेस्ट्रॉल या रक्त में फैट का कम से कम एक स्तर सामान्य सीमा से बाहर पाया गया, जो भविष्य में हृदय रोगों का कारण बन सकता है।

किन आदतों से बढ़ता है खतरा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ सामान्य दिखने वाली आदतें धीरे-धीरे दिल को कमजोर कर सकती हैं।

लंबे समय तक बैठे रहना: लगातार कुर्सी पर बैठकर काम करने से शरीर की कैलोरी कम खर्च होती है, जिससे मोटापा, हाई ब्लड शुगर और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है। इससे हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।

जंक और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन: पिज्जा, बर्गर, पैकेट वाले स्नैक्स और तले-भुने खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट अधिक होता है। इनका नियमित सेवन ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल दोनों को बढ़ा सकता है।

तंबाकू और धूम्रपान: सिगरेट या किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

व्यायाम की कमी: नियमित शारीरिक गतिविधि न करने से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट की हल्की या मध्यम एक्सरसाइज दिल को स्वस्थ रखने में मदद करती है।

लगातार तनाव: लंबे समय तक मानसिक तनाव रहने से स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हृदय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

पर्याप्त नींद न लेना: रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद न मिलने पर हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

नियमित जांच भी है जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं अक्सर बिना किसी लक्षण के विकसित होती हैं। इसलिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना जरूरी है। जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्टों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

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बारिश में भीगने से पहले जान लें ये बातें, स्किन और बालों को हो सकता है नुकसान https://bharatsamwad.com/before-getting-wet-in-the-rain-know-these-things/ Tue, 21 Jul 2026 06:10:35 +0000 https://bharatsamwad.com/before-getting-wet-in-the-rain-know-these-things/

मानसून की फुहारें गर्मी से राहत तो देती हैं, लेकिन बिना सावधानी के बारिश में भीगना आपकी त्वचा और बालों की सेहत पर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि खासकर शुरुआती बारिश का पानी वातावरण में मौजूद धूल, धुआं और अन्य प्रदूषकों को अपने साथ लेकर आता है। ऐसे में यदि भीगने के बाद सही देखभाल न की जाए, तो स्किन एलर्जी, फंगल इंफेक्शन और बालों से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं।

बारिश का पानी त्वचा को कैसे प्रभावित करता है?

1. एलर्जी और खुजली की समस्या
पहली बारिश का पानी पूरी तरह साफ नहीं होता। इसमें मौजूद धूल, केमिकल्स और प्रदूषक संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में खुजली, लालपन और जलन जैसी परेशानियां पैदा कर सकते हैं।

2. फंगल इंफेक्शन का बढ़ता खतरा
मानसून में वातावरण में नमी अधिक रहती है। यदि भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़े पहने रहें, तो त्वचा पर फंगस पनपने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दाद, रैशेज और खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

3. पिंपल्स और ऑयली स्किन
इस मौसम में त्वचा अधिक तैलीय हो सकती है। यदि चेहरे पर बारिश का पानी सूख जाए और उसे साफ न किया जाए, तो रोमछिद्र बंद होने लगते हैं, जिससे मुंहासे और ब्लैकहेड्स की समस्या बढ़ सकती है।

4. त्वचा की सुरक्षा परत को नुकसान
बारिश के पानी में मौजूद प्रदूषक त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा पर असर डाल सकते हैं, जिससे त्वचा रूखी और बेजान महसूस होने लगती है।

बालों पर बारिश का क्या असर पड़ता है?

1. बालों की चमक और नमी कम होना
बारिश का पानी बालों के प्राकृतिक तेल को प्रभावित कर सकता है, जिससे बाल रूखे और बेजान नजर आने लगते हैं।

2. हेयर फॉल की समस्या
बारिश में भीगने के बाद यदि बालों को अच्छी तरह साफ और सुखाया न जाए, तो स्कैल्प पर गंदगी जमा हो सकती है। इससे बाल कमजोर होकर टूटने और झड़ने लगते हैं।

3. डैंड्रफ और स्कैल्प इंफेक्शन
लंबे समय तक गीले बाल रहने से स्कैल्प में फंगस और बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो डैंड्रफ और खुजली का कारण बनते हैं।

4. बालों का उलझना और टूटना
बारिश के पानी और नमी के कारण बालों की बाहरी परत प्रभावित होती है, जिससे वे अधिक उलझने और टूटने लगते हैं।

बारिश में भीगने के बाद अपनाएं ये उपाय
घर पहुंचते ही साफ पानी से चेहरा और बाल धो लें।
माइल्ड शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल करें।
त्वचा को अच्छी तरह सुखाकर मॉइस्चराइजर लगाएं।
गीले बालों में कंघी करने से बचें।
भीगे कपड़े तुरंत बदल लें।
शरीर को सूखा रखें ताकि फंगल इंफेक्शन का खतरा कम हो।
पर्याप्त पानी पिएं और संतुलित आहार लें।
किन लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन लोगों को पहले से एलर्जी, एक्जिमा, सोरायसिस, बार-बार फंगल इंफेक्शन या बाल झड़ने की समस्या रहती है, उन्हें बारिश में भीगने से बचना चाहिए। यदि भीगने के बाद त्वचा पर लगातार खुजली, रैशेज, फफोले या बालों के झड़ने की समस्या बढ़ जाए, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होगा।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या उपचार के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

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नहाते समय सबसे पहले शरीर के किस हिस्से पर डालना चाहिए पानी? जानें सही तरीका https://bharatsamwad.com/while-bathing-on-which-part-of-the-body-should-water-be-poured-first-know-the-correct-method/ Mon, 20 Jul 2026 10:29:04 +0000 https://bharatsamwad.com/while-bathing-on-which-part-of-the-body-should-water-be-poured-first-know-the-correct-method/

नहाना सिर्फ शरीर की सफाई का तरीका नहीं, बल्कि सेहत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण आदत भी माना जाता है। आयुर्वेद में स्नान को दैनिक दिनचर्या (दिनचर्या) का अहम हिस्सा बताया गया है और इसके सही तरीके पर भी विशेष जोर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, नहाने का क्रम और पानी का तापमान शरीर पर अलग-अलग प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि स्नान की शुरुआत शरीर के किस हिस्से से करनी चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार कैसे करें स्नान की शुरुआत?

आयुर्वेद में सलाह दी जाती है कि स्नान करते समय सबसे पहले पैरों पर पानी डालना चाहिए। माना जाता है कि इससे शरीर धीरे-धीरे पानी के तापमान के अनुसार खुद को ढाल लेता है। इसके बाद घुटनों, हाथों, शरीर और अंत में सिर पर पानी डालना अधिक संतुलित तरीका माना जाता है।

पहले सिर पर पानी डालना क्यों सही नहीं माना जाता?

कई लोगों की आदत होती है कि वे सीधे सिर पर पानी डालकर नहाना शुरू कर देते हैं। आयुर्वेद के अनुसार ऐसा करने से शरीर को अचानक तापमान में बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर जिन लोगों को माइग्रेन, साइनस, हाई या लो ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं, उन्हें इस आदत से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, इसका असर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और मौसम पर भी निर्भर करता है।

धीरे-धीरे पानी डालने के क्या हो सकते हैं फायदे?

पैरों से स्नान शुरू करने पर शरीर को पानी के तापमान के साथ तालमेल बैठाने का समय मिलता है। इससे अचानक ठंडे या गर्म पानी के संपर्क में आने से होने वाली असहजता कम हो सकती है। यह तरीका शरीर को आरामदायक महसूस कराने में भी मददगार माना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार स्नान करते समय रखें इन बातों का ध्यान

सुबह के समय स्नान करना शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी माना गया है।
बहुत अधिक गर्म पानी त्वचा की प्राकृतिक नमी कम कर सकता है, जबकि अत्यधिक ठंडा पानी हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। इसलिए मौसम और अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार पानी का चुनाव करें।
स्नान से पहले हल्की तेल मालिश (अभ्यंग) करने से त्वचा को पोषण और शरीर को आराम मिल सकता है।
लंबे समय तक पानी में रहने से त्वचा रूखी हो सकती है, इसलिए सीमित समय में स्नान करना बेहतर माना जाता है।
नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह सुखाएं, मॉइस्चराइजर लगाएं और हमेशा साफ व सूखे तौलिए का इस्तेमाल करें।

नोट: यह लेख आयुर्वेदिक मान्यताओं और उपलब्ध स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्टों पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या विशेष चिकित्सीय स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।

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बारिश में बढ़ जाता है स्टमक फ्लू का खतरा! जानिए कारण, लक्षण और बचाव के आसान उपाय https://bharatsamwad.com/the-risk-of-stomach-flu-increases-in-rain-know-the-causes-symptoms-and-easy-measures-for-prevention/ Tue, 14 Jul 2026 17:51:53 +0000 https://bharatsamwad.com/the-risk-of-stomach-flu-increases-in-rain-know-the-causes-symptoms-and-easy-measures-for-prevention/

 #####  बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी लेकर आता है। इस मौसम में स्टमक फ्लू (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) और फूड प्वाइजनिंग के मामले तेजी से बढ़ते हैं। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के अनुसार, बारिश के दौरान दूषित पानी और संक्रमित भोजन के कारण होने वाली जलजनित बीमारियां (Waterborne Diseases) देश में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती हैं।

ऐसे में केवल साफ पानी पीना ही काफी नहीं है, बल्कि खानपान और रसोई की स्वच्छता का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।


क्या है स्टमक फ्लू?

स्टमक फ्लू, जिसे गैस्ट्रोएंटेराइटिस (Gastroenteritis) भी कहा जाता है, पेट और आंतों का संक्रमण है। यह मुख्य रूप से नोरोवायरस (Norovirus), बैक्टीरिया या दूषित भोजन एवं पानी के कारण होता है।

समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी डिहाइड्रेशन (Dehydration), लो ब्लड प्रेशर, मांसपेशियों में ऐंठन और गंभीर कमजोरी जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है।


बारिश में स्टमक फ्लू क्यों बढ़ता है?

1. बैक्टीरिया और वायरस तेजी से बढ़ते हैं

  • बारिश में नमी और उमस अधिक होती है।
  • यह मौसम वायरस और बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल होता है।
  • दूषित भोजन और पानी संक्रमण का सबसे बड़ा कारण बनते हैं।

2. दूषित पानी का सेवन

  • बारिश में जल स्रोत आसानी से दूषित हो जाते हैं।
  • बिना उबाला या बिना फिल्टर किया पानी पीना संक्रमण का खतरा बढ़ाता है।

3. सड़क किनारे मिलने वाला खाना

  • खुला रखा हुआ भोजन, चाट, गोलगप्पे, कटे फल और जूस जल्दी संक्रमित हो सकते हैं।
  • बारिश में इन्हें खाने से फूड प्वाइजनिंग और स्टमक फ्लू का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

4. रसोई की सफाई में लापरवाही

  • गंदे चॉपिंग बोर्ड, चाकू, किचन प्लेटफॉर्म और बर्तन भी संक्रमण फैला सकते हैं।
  • कच्चे और पके हुए भोजन को अलग-अलग रखना जरूरी है।

5. अंकुरित अनाज का गलत सेवन

  • बारिश में अंकुरित अनाज पर बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं।
  • इन्हें कच्चा खाने की बजाय हल्का उबालकर या पकाकर खाना बेहतर होता है।

स्टमक फ्लू के प्रमुख लक्षण

  • पेट में मरोड़ और तेज ऐंठन
  • बार-बार दस्त (डायरिया)
  • उल्टी या जी मिचलाना
  • हल्का या तेज बुखार
  • सिर दर्द
  • कमजोरी और थकान
  • डिहाइड्रेशन
  • चक्कर आना
  • मांसपेशियों में ऐंठन

बारिश में कैसे करें बचाव?

1. केवल साफ और सुरक्षित पानी पिएं

  • उबला हुआ या फिल्टर किया पानी ही पिएं।
  • बाहर का पानी पीने से बचें।

2. फल और सब्जियां अच्छी तरह धोएं

  • खाने से पहले साफ पानी से धोएं।
  • चाहें तो पानी में थोड़ा विनेगर मिलाकर कुछ मिनट भिगो सकते हैं।

3. हाथ धोना न भूलें

  • खाना बनाने और खाने से पहले हाथ धोएं।
  • शौचालय जाने, बाहर से आने और पालतू जानवरों को छूने के बाद भी हाथ जरूर साफ करें।

4. रसोई को साफ रखें

  • चॉपिंग बोर्ड, चाकू और बर्तनों को अच्छी तरह धोएं।
  • कच्चे और पके भोजन के लिए अलग-अलग बर्तन रखें।

5. बासी खाना खाने से बचें

  • लंबे समय तक बाहर रखा भोजन न खाएं।
  • फ्रिज में रखा खाना बार-बार गर्म करके खाने से बचें।

6. स्ट्रीट फूड से दूरी रखें

  • बारिश में खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ संक्रमण का बड़ा कारण बन सकते हैं।

7. पर्याप्त पानी पिएं

  • यदि दस्त या उल्टी हो रही हो तो ORS, नारियल पानी और पर्याप्त तरल पदार्थ लें।

स्टमक फ्लू और फूड प्वाइजनिंग में अंतर

स्टमक फ्लू फूड प्वाइजनिंग
वायरस या बैक्टीरिया से संक्रमण दूषित भोजन के सेवन से
लक्षण धीरे-धीरे भी उभर सकते हैं लक्षण अक्सर कुछ घंटों में शुरू हो जाते हैं
व्यक्ति से व्यक्ति में भी फैल सकता है आमतौर पर संक्रमित भोजन तक सीमित

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

  • लगातार 24 घंटे से ज्यादा उल्टी या दस्त
  • मल में खून आना
  • तेज बुखार
  • पेशाब कम आना
  • अत्यधिक कमजोरी
  • बार-बार चक्कर आना
  • बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में गंभीर लक्षण

निष्कर्ष

बारिश के मौसम में थोड़ी-सी सावधानी आपको स्टमक फ्लू, फूड प्वाइजनिंग और अन्य जलजनित बीमारियों से बचा सकती है। साफ पानी, स्वच्छ भोजन, हाथों की सफाई और रसोई की स्वच्छता अपनाकर आप खुद और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।

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मुंह के छालों से हैं परेशान? अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय, मिलेगी राहत https://bharatsamwad.com/if-you-are-troubled-by-mouth-ulcers-adopt-these-easy-home-remedies-and-you-will-get-relief/ Mon, 13 Jul 2026 07:31:08 +0000 https://bharatsamwad.com/if-you-are-troubled-by-mouth-ulcers-adopt-these-easy-home-remedies-and-you-will-get-relief/

मुंह के छाले देखने में भले ही छोटे हों, लेकिन इनकी वजह से खाना, पीना और बोलना तक मुश्किल हो सकता है। कई बार पोषक तत्वों की कमी, तनाव या मसालेदार भोजन इसकी वजह बनते हैं। हालांकि, सही देखभाल और कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर दर्द से राहत पाई जा सकती है और छालों को जल्दी ठीक होने में मदद मिल सकती है।

मुंह के छाले एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या हैं, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। ये आमतौर पर जीभ, होंठों के अंदर, मसूड़ों या गालों की भीतरी परत पर छोटे सफेद या पीले घाव के रूप में दिखाई देते हैं। छाले होने पर भोजन करना, पानी पीना और बातचीत करना भी असहज महसूस हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में विटामिन B12, आयरन और फोलिक एसिड की कमी, अत्यधिक तनाव, हार्मोनल बदलाव, मसालेदार भोजन, मुंह के अंदर चोट लगना या कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता जैसी स्थितियां छालों का कारण बन सकती हैं। अधिकांश मामलों में ये 7 से 14 दिनों के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन इस दौरान उचित देखभाल जरूरी होती है।

छाले होने पर क्या करें?
मसालेदार, खट्टे और बहुत गर्म भोजन से कुछ दिनों तक दूरी बनाएं।
दिन में 3 से 4 बार गुनगुने नमक वाले पानी से कुल्ला करें।
शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
मुलायम, ठंडा और आसानी से चबाया जाने वाला भोजन लें।
मुंह की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश का उपयोग करें।
यदि दर्द अधिक हो तो डॉक्टर की सलाह पर ओरल जेल या दवा का इस्तेमाल करें।

घरेलू उपाय जो दे सकते हैं राहत

1. नमक वाले पानी से कुल्ला
गुनगुने पानी में नमक मिलाकर कुल्ला करने से मुंह साफ रहता है और संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।

2. शहद का इस्तेमाल
शहद में मौजूद प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और सूजन कम करने वाले गुण छालों को आराम पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। दिन में दो से तीन बार हल्की मात्रा में शहद लगाया जा सकता है।

3. नारियल तेल
नारियल तेल सूजन कम करने और घाव भरने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है।

4. बेकिंग सोडा से कुल्ला
पानी में थोड़ा-सा बेकिंग सोडा मिलाकर कुल्ला करने से मुंह का pH संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।

5. ठंडी चीजों का सेवन
बर्फ का छोटा टुकड़ा या ठंडा पानी दर्द और जलन से अस्थायी राहत दिला सकता है।

इन चीजों से करें परहेज
अत्यधिक मसालेदार और तीखा भोजन
अधिक खट्टे फल और जूस
धूम्रपान और तंबाकू
शराब का सेवन
बहुत गर्म चाय, कॉफी या अन्य पेय

कब लें डॉक्टर की सलाह?

यदि छाले दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, बार-बार निकलें, तेज बुखार के साथ हों, खाना या पानी निगलने में परेशानी हो या छाले बहुत बड़े और अत्यधिक दर्दनाक हों, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी दवा या उपचार को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

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Monsoon Diet Tips: आयुर्वेद के अनुसार बारिश में क्या खाएं और किन चीजों से करें परहेज? https://bharatsamwad.com/monsoon-diet-tips-according-to-ayurveda-what-to-eat-and-what-to-avoid-during-rains/ Sun, 12 Jul 2026 17:34:42 +0000 https://bharatsamwad.com/monsoon-diet-tips-according-to-ayurveda-what-to-eat-and-what-to-avoid-during-rains/

बरसात के मौसम में आयुर्वेद के अनुसार क्या खाना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए? जानें मॉनसून डाइट, इम्युनिटी बढ़ाने वाले फूड्स और पाचन को बेहतर रखने के आसान आयुर्वेदिक टिप्स।

बारिश का मौसम अपने साथ ठंडक तो लाता है, लेकिन संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देता है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान सही खानपान अपनाकर इम्युनिटी मजबूत रखी जा सकती है और कई मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है।

मॉनसून में क्या खाएं?

  • पुराने अनाज जैसे चावल, गेहूं और जौ का सेवन करें।
  • मूंग दाल को डाइट में शामिल करें, यह पचने में हल्की होती है।
  • उबली और हल्की पकी हुई सब्जियां खाएं।
  • सीमित मात्रा में घी का सेवन करें, यह वात दोष को शांत करने में मदद करता है।
  • गर्म और ताजा भोजन करें।
  • खट्टे, नमकीन और हल्के मसालेदार भोजन का संतुलित सेवन करें।

मॉनसून में किन चीजों से बचें?

  • हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन कम करें।
  • दूध और दूध से बने उत्पादों का अधिक सेवन न करें।
  • फर्मेंटेड (खमीर वाले) खाद्य पदार्थ सीमित मात्रा में लें।
  • डीप फ्राइड और जंक फूड से दूरी बनाएं।
  • कच्चा सलाद खाने से बचें और सब्जियों को अच्छी तरह पकाकर खाएं।

नोट: आयुर्वेदिक सलाह व्यक्ति की प्रकृति (वात, पित्त, कफ), उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकती है। यदि आपको कोई बीमारी है या विशेष डाइट का पालन कर रहे हैं, तो आयुर्वेदिक चिकित्सक या डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं ये 6 हरी पत्तियां, इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर दिल और पाचन तक को मिलता है फायदा https://bharatsamwad.com/these-6-green-leaves-are-no-less-than-a-boon-for-health-they-provide-benefits-from-increasing-immunity-to-heart-and-digestion/ Sat, 11 Jul 2026 06:59:18 +0000 https://bharatsamwad.com/these-6-green-leaves-are-no-less-than-a-boon-for-health-they-provide-benefits-from-increasing-immunity-to-heart-and-digestion/

स्वस्थ रहने के लिए फल और सब्जियों का सेवन जरूरी माना जाता है, लेकिन प्रकृति ने हमें कुछ ऐसी औषधीय पत्तियां भी दी हैं जो पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। आयुर्वेद में इन पत्तियों का उपयोग सदियों से विभिन्न बीमारियों की रोकथाम और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता रहा है।

इन हरी पत्तियों में मौजूद विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, तनाव कम करने और हृदय को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसी 6 औषधीय पत्तियों के बारे में, जिन्हें अपनी दिनचर्या में सीमित मात्रा में शामिल कर आप कई स्वास्थ्य लाभ पा सकते हैं।

तुलसी के पत्ते: इम्यूनिटी और तनाव दोनों के लिए फायदेमंद

भारतीय घरों में तुलसी का धार्मिक और औषधीय दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व है। तुलसी की पत्तियों में विटामिन ए, सी और के के अलावा कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम और कई शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।

नियमित रूप से तुलसी की कुछ पत्तियों का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो सकती है। इसके अलावा यह तनाव और चिंता को कम करने, पाचन क्रिया को बेहतर बनाने तथा हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में भी मददगार मानी जाती है। सर्दी, खांसी और गले की खराश जैसी समस्याओं में भी तुलसी का इस्तेमाल घरेलू नुस्खों में किया जाता है।

नीम के पत्ते: प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर

नीम को प्राकृतिक औषधि कहा जाता है। इसकी पत्तियों में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो शरीर को कई प्रकार के संक्रमणों से बचाने में सहायक माने जाते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार नीम की पत्तियां इम्यूनिटी मजबूत करने, सूजन कम करने, त्वचा को स्वस्थ रखने और दांतों व मसूड़ों की समस्याओं से राहत दिलाने में उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि इसका सेवन सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।

कड़ी पत्ता: स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना

भारतीय रसोई में कड़ी पत्ता केवल स्वाद बढ़ाने के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य लाभ के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, फाइबर और कई आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार कड़ी पत्ता कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और कब्ज व दस्त जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा आंखों की सेहत बनाए रखने और बालों के झड़ने की समस्या को कम करने में भी इसे लाभकारी माना जाता है।

पुदीना के पत्ते: पाचन और ताजगी का बेहतरीन स्रोत

पुदीना अपनी ठंडक और ताजगी के लिए जाना जाता है। इसमें विटामिन ए, आयरन, फोलेट, मैंगनीज और कई आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

पुदीने का सेवन पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाने तथा शरीर को तरोताजा महसूस कराने में मदद कर सकता है। इसकी खुशबू तनाव कम करने और मूड बेहतर बनाने में भी सहायक मानी जाती है।

पपीते के पत्ते: एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

पपीते के पत्तों में विटामिन ए, सी, ई और कई शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। कुछ अध्ययनों में यह देखा गया है कि डेंगू के मरीजों में पपीते की पत्तियों के अर्क का उपयोग प्लेटलेट्स बढ़ाने में सहायक हो सकता है, लेकिन इस पर अभी और वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है।

इसलिए डेंगू या मलेरिया जैसी बीमारियों में इसे इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह और उचित चिकित्सा सबसे जरूरी है।

पान के पत्ते: सिर्फ स्वाद नहीं, कई औषधीय गुण भी

पान के पत्ते का उपयोग केवल स्वाद के लिए ही नहीं किया जाता, बल्कि आयुर्वेद में इसे कई स्वास्थ्य लाभों के लिए भी जाना जाता है। सीमित मात्रा में साधारण पान के पत्ते का सेवन पाचन सुधारने, मुंह की दुर्गंध कम करने और सर्दी-जुकाम में राहत दिलाने में मददगार माना जाता है।

हालांकि तंबाकू, सुपारी या अन्य हानिकारक पदार्थों के साथ पान का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।

ध्यान रखें

हालांकि ये सभी पत्तियां औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती हैं, लेकिन किसी भी बीमारी के इलाज के विकल्प के रूप में इनका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। यदि आप किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, गर्भवती हैं या नियमित दवाएं ले रहे हैं, तो इनका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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दांत दर्द से हैं परेशान? जानिए घर पर राहत पाने के आसान और असरदार उपाय https://bharatsamwad.com/are-you-troubled-by-toothache-know-the-easy-and-effective-ways-to-get-relief-at-home/ Fri, 10 Jul 2026 06:24:29 +0000 https://bharatsamwad.com/are-you-troubled-by-toothache-know-the-easy-and-effective-ways-to-get-relief-at-home/

दांतों में अचानक होने वाला दर्द रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना सकता है। कई बार यह दर्द कुछ समय में ठीक हो जाता है, लेकिन कई मामलों में यह किसी गंभीर दंत समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में दर्द की वजह को समझना और सही समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है। हल्के दर्द की स्थिति में कुछ घरेलू उपाय अस्थायी राहत दिला सकते हैं।

आखिर क्यों होता है दांतों में दर्द?

दांत दर्द के कई कारण हो सकते हैं। सबसे सामान्य वजह दांतों में कैविटी बनना है। जब बैक्टीरिया दांत की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाते हुए अंदर की नसों तक पहुंच जाते हैं, तो तेज दर्द शुरू हो सकता है। इसके अलावा मसूड़ों में संक्रमण, अक्ल दाढ़ निकलना, दांतों में दरार आना या ठंडे-गरम खाद्य पदार्थों के प्रति संवेदनशीलता भी दर्द की वजह बन सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार दर्द निवारक दवा लेने की बजाय दर्द के वास्तविक कारण का पता लगाना ज्यादा जरूरी है। यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे, सूजन हो या पस निकलने लगे तो तुरंत दंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

हल्के दर्द में अपनाए जा सकते हैं ये घरेलू उपाय

लौंग से मिल सकती है अस्थायी राहत

दांत दर्द के घरेलू उपायों में लौंग का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। इसमें मौजूद यूजेनॉल नामक तत्व हल्के दर्द को कम करने और बैक्टीरिया के प्रभाव को घटाने में मदद कर सकता है। दर्द वाले दांत के पास लौंग रखकर धीरे-धीरे चबाना या बहुत कम मात्रा में लौंग का तेल कॉटन की मदद से लगाना कुछ समय के लिए राहत दे सकता है। हालांकि तेल का अधिक उपयोग मसूड़ों में जलन पैदा कर सकता है।

गुनगुने नमक के पानी से करें कुल्ला

गुनगुने पानी में नमक मिलाकर कुल्ला करना मुंह की सफाई बनाए रखने का आसान तरीका माना जाता है। इससे भोजन के कण और बैक्टीरिया हटाने में मदद मिलती है, साथ ही मसूड़ों की हल्की सूजन भी कम हो सकती है। नियमित कुल्ला करने से संक्रमण बढ़ने की संभावना भी घट सकती है।

लहसुन के एंटीबैक्टीरियल गुण

लहसुन में पाया जाने वाला एलिसिन प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल तत्व माना जाता है। शुरुआती संक्रमण की स्थिति में यह बैक्टीरिया की वृद्धि को कम करने में सहायक हो सकता है। लहसुन की एक कली को हल्का कुचलकर प्रभावित दांत के पास कुछ देर रखने से कुछ लोगों को आराम महसूस हो सकता है।

सूजन होने पर करें ठंडी सिकाई

यदि दांत दर्द के साथ गाल या चेहरे पर सूजन भी हो, तो बर्फ को कपड़े में लपेटकर प्रभावित हिस्से के बाहर हल्की सिकाई की जा सकती है। इससे सूजन और दर्द में अस्थायी राहत मिल सकती है। हालांकि यदि दर्द का कारण गंभीर संक्रमण है, तो केवल ठंडी सिकाई पर्याप्त नहीं होती और डॉक्टर से इलाज कराना आवश्यक होता है।

कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?

अगर दांत का दर्द लगातार कई घंटों या दिनों तक बना रहे, दर्द के साथ बुखार, सूजन या पस दिखाई दे, या खाने-पीने में दिक्कत होने लगे, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने की बजाय तुरंत दंत चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज कराने से संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सकता है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

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क्या पीरियड्स शुरू होने के बाद लड़कियों की हाइट बढ़ना बंद हो जाती है? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ https://bharatsamwad.com/does-the-height-of-girls-stop-increasing-after-periods-start-know-what-experts-say/ Wed, 08 Jul 2026 17:59:48 +0000 https://bharatsamwad.com/does-the-height-of-girls-stop-increasing-after-periods-start-know-what-experts-say/

अक्सर माना जाता है कि लड़कियों की हाइट पीरियड्स शुरू होने के साथ ही बढ़ना बंद हो जाती है। अगर किसी लड़की की लंबाई कम हो और उसे जल्दी पीरियड्स आ जाएं, तो माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है कि अब उसकी हाइट बढ़ेगी या नहीं। हालांकि, यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। आइए जानते हैं कि पीरियड्स और हाइट के बीच क्या संबंध है और किन बातों का ध्यान रखकर बच्चों की बेहतर ग्रोथ सुनिश्चित की जा सकती है।

क्या पीरियड्स के बाद हाइट बढ़ना पूरी तरह रुक जाता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, लड़कियों की लंबाई आमतौर पर 15 से 16 वर्ष की उम्र तक बढ़ती रहती है। हालांकि, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि उनका पहला पीरियड (मेनार्की) किस उम्र में शुरू हुआ।

आमतौर पर लड़कियों में 8 से 13 वर्ष की उम्र के बीच प्यूबर्टी की शुरुआत होती है और 10 से 14 वर्ष के बीच पहला पीरियड आता है। इसके बाद भी हड्डियों की ग्रोथ प्लेट्स कुछ समय तक सक्रिय रहती हैं। इसलिए अधिकांश लड़कियों की हाइट पीरियड्स शुरू होने के बाद करीब 1 से 2 साल तक थोड़ी-बहुत बढ़ सकती है, लेकिन यह बढ़ोतरी आमतौर पर कुछ इंच तक ही सीमित रहती है।

लड़कों और लड़कियों की ग्रोथ में अंतर

लड़कों में प्यूबर्टी सामान्यतः 9 से 14 वर्ष के बीच शुरू होती है और उनकी ग्रोथ स्पर्ट 12 से 15 वर्ष की उम्र में देखने को मिलती है। यही वजह है कि लड़कों की लंबाई अक्सर 17 वर्ष या उससे अधिक उम्र तक बढ़ती रहती है, जबकि लड़कियों में यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत पहले पूरी हो जाती है।

लड़कियों की औसत हाइट कितनी होती है?

साल 2018 के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के आंकड़ों के अनुसार, 20 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं की औसत लंबाई लगभग 5 फुट 4 इंच (करीब 162 सेंटीमीटर) होती है।

ध्यान रहे कि यह केवल औसत आंकड़ा है। किसी व्यक्ति की हाइट पर आनुवंशिक (Genetics), पोषण, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य संबंधी कई अन्य कारकों का भी प्रभाव पड़ता है।

किन कारणों से रुक सकती है हाइट?

पीरियड्स शुरू होना ही हाइट रुकने का एकमात्र कारण नहीं है। कई अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी बच्चों की ग्रोथ को प्रभावित कर सकती हैं, जैसे—

  • ग्रोथ हार्मोन की कमी
  • संतुलित और पौष्टिक आहार की कमी
  • डाउन सिंड्रोम
  • नूनन सिंड्रोम
  • मार्फन सिंड्रोम
  • लंबे समय तक रहने वाली कुछ गंभीर बीमारियां या पोषण संबंधी समस्याएं

हाइट बढ़ाने के लिए क्या करें?

बच्चों की बेहतर ग्रोथ के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन-डी का सेवन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जरूरी है। यदि बच्चे की लंबाई उम्र के अनुसार सामान्य से काफी कम लग रही हो या ग्रोथ लंबे समय से रुकी हुई दिखाई दे, तो बाल रोग विशेषज्ञ या एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से सलाह लेना उचित रहेगा।

निष्कर्ष: पीरियड्स शुरू होने के बाद लड़कियों की हाइट अचानक पूरी तरह रुक नहीं जाती। अधिकांश मामलों में अगले 1-2 वर्षों तक कुछ ग्रोथ होती है, लेकिन इसकी गति धीमी हो जाती है। हाइट पर केवल पीरियड्स नहीं, बल्कि जेनेटिक्स, पोषण और समग्र स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

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धूल-मिट्टी ही नहीं, ये 6 छिपे कारण भी बढ़ा सकते हैं आपकी एलर्जी, डॉक्टर ने बताए बचाव के आसान तरीके https://bharatsamwad.com/not-only-dust-and-dirt-these-6-hidden-reasons-can-also-increase-your-allergies-doctor-told-easy-ways-to-prevent-them/ Tue, 07 Jul 2026 08:00:05 +0000 https://bharatsamwad.com/not-only-dust-and-dirt-these-6-hidden-reasons-can-also-increase-your-allergies-doctor-told-easy-ways-to-prevent-them/

अक्सर लोग मानते हैं कि एलर्जी केवल धूल, मिट्टी या किसी खास खाद्य पदार्थ की वजह से होती है। इसलिए वे इन चीजों से बचने की कोशिश भी करते हैं। लेकिन कई बार पूरी सावधानी बरतने के बावजूद छींकें आना, नाक बंद होना, आंखों में खुजली या त्वचा पर लाल चकत्ते जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में मौजूद कुछ ऐसे कारण हो सकते हैं, जिन पर आमतौर पर ध्यान नहीं जाता। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ छिपे हुए ट्रिगर्स और उनसे बचने के उपाय।

1. आपका बेडरूम भी हो सकता है वजह

गद्दे, तकिए और चादरों में डस्ट माइट्स (सूक्ष्म जीव) पनप सकते हैं। ये नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन सांस के जरिए शरीर में पहुंचकर एलर्जी की समस्या बढ़ा सकते हैं।

कैसे पहचानें?

  • सुबह उठते ही लगातार छींकें आना।
  • नाक बंद रहना या आंखों में खुजली होना।

बचाव के उपाय

  • चादर और तकिए के कवर हर सप्ताह लगभग 60°C गर्म पानी में धोएं।
  • बेडरूम में कालीन कम रखें।
  • एलर्जेन-प्रूफ गद्दे और तकिए के कवर का इस्तेमाल करें।

2. एसी और कूलर के गंदे फिल्टर

अगर एयर कंडीशनर या कूलर के फिल्टर समय पर साफ नहीं किए जाते, तो उनमें धूल, फफूंद और अन्य एलर्जी पैदा करने वाले कण जमा हो जाते हैं, जो पूरे कमरे में फैल सकते हैं।

संकेत

  • एसी या कूलर चालू करते ही छींक या सांस लेने में परेशानी बढ़ना।

बचाव

  • हर 1–3 महीने में फिल्टर साफ या बदलें।
  • संभव हो तो बेहतर गुणवत्ता वाले फिल्टर का इस्तेमाल करें।

3. रूम फ्रेशनर और तेज खुशबू वाले प्रोडक्ट

रूम फ्रेशनर, सुगंधित मोमबत्तियां, फैब्रिक सॉफ्टनर, नया पेंट और नया फर्नीचर हवा में ऐसे रसायन छोड़ सकते हैं जो संवेदनशील लोगों में एलर्जी के लक्षण बढ़ा सकते हैं।

क्या करें?

  • कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें।
  • तेज खुशबू वाले उत्पादों का सीमित इस्तेमाल करें।
  • नए पेंट या फर्नीचर के बाद कमरे को अच्छी तरह हवादार रखें।

4. प्रोसेस्ड फूड और छिपे हुए एलर्जेन

पैकेट वाले खाद्य पदार्थों में मौजूद कुछ रंग, प्रिजर्वेटिव और फ्लेवरिंग एजेंट संवेदनशील लोगों में एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं। कुछ लोगों को कच्चे फल या सब्जियां खाने के बाद भी एलर्जी के लक्षण महसूस हो सकते हैं।

बचाव

  • अगर किसी भोजन के बाद बार-बार परेशानी होती है, तो फूड डायरी बनाएं।
  • डॉक्टर की सलाह से जरूरत पड़ने पर एलर्जी टेस्ट कराएं।

5. वायु प्रदूषण

प्रदूषित हवा सांस की नलियों को प्रभावित कर एलर्जी और अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकती है। खराब एयर क्वालिटी वाले दिनों में समस्या अधिक हो सकती है।

क्या करें?

  • रोजाना अपने शहर का AQI देखें।
  • प्रदूषण अधिक होने पर बाहर कम निकलें।
  • जरूरत पड़ने पर घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।

6. तनाव भी बन सकता है कारण

लगातार मानसिक तनाव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है, जिससे कुछ लोगों में एलर्जी के लक्षण अधिक महसूस हो सकते हैं।

तनाव कम करने के उपाय

  • पर्याप्त नींद लें।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • योग, ध्यान या अन्य तनाव कम करने वाली गतिविधियों को अपनाएं।

कब डॉक्टर से मिलें?

अगर बार-बार छींकें आना, सांस लेने में तकलीफ, त्वचा पर चकत्ते, आंखों में तेज जलन या एलर्जी के लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो स्वयं इलाज करने के बजाय एलर्जी विशेषज्ञ या डॉक्टर से परामर्श लें। सही जांच से एलर्जी के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सकता है और उसके अनुसार उपचार शुरू किया जा सकता है।

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