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प्रेग्नेंसी में दादी-नानी की हर सलाह अंधविश्वास नहीं! इन 6 पारंपरिक बातों को साइंस भी मानता है सही

प्रेग्नेंसी में दादी-नानी की हर सलाह अंधविश्वास नहीं! इन 6 पारंपरिक बातों को साइंस भी मानता है सही

घी खाना, तनाव से बचना, बच्चे से बातें करना और पर्याप्त आराम जैसी सलाह के पीछे छिपे हैं वैज्ञानिक कारण

प्रेग्नेंसी के दौरान घर के बड़े-बुजुर्ग, खासकर दादी-नानी, कई तरह की सलाह देती हैं। आधुनिक दौर में इन्हें अक्सर पुराने जमाने की बातें या अंधविश्वास समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार इनमें से कई सलाह ऐसी हैं, जिनके पीछे ठोस वैज्ञानिक आधार मौजूद है।

डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान खानपान, मानसिक स्थिति और दैनिक आदतें मां और गर्भ में पल रहे शिशु, दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। आइए जानते हैं प्रेग्नेंसी से जुड़ी ऐसी ही कुछ पारंपरिक सलाह, जिन्हें विज्ञान भी सही मानता है।

1. सीमित मात्रा में घी खाना फायदेमंद हो सकता है

गर्भावस्था में घी खाने की सलाह वर्षों से दी जाती रही है। वैज्ञानिक दृष्टि से घी में मौजूद कुछ फैटी एसिड, जैसे ब्यूटिरिक एसिड, शरीर के लिए उपयोगी हो सकते हैं। यह पाचन तंत्र के स्वास्थ्य में मदद करता है और संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घी का सेवन संतुलित मात्रा में ही करें। अधिक मात्रा में घी खाने से अनावश्यक वजन बढ़ सकता है। इसलिए अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर रहता है।

2. तनाव और गुस्से से बचना जरूरी

दादी-नानी अक्सर गर्भवती महिलाओं को गुस्सा न करने और खुश रहने की सलाह देती हैं। विज्ञान भी बताता है कि लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर में कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ा सकता है, जिसका असर मां और गर्भस्थ शिशु दोनों पर पड़ सकता है।

इसलिए गर्भावस्था के दौरान मानसिक शांति, पर्याप्त नींद और सकारात्मक माहौल बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

3. बच्चे से बातें करें, गाना गाएं और पढ़ें

गर्भावस्था के मध्य चरण में भ्रूण की सुनने की क्षमता विकसित होने लगती है। ऐसे में मां का बच्चे से बातें करना, मधुर संगीत सुनना या किताब पढ़ना भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने में मदद कर सकता है।

हालांकि यह कहना कि इससे बच्चे की बुद्धिमत्ता निश्चित रूप से बढ़ जाएगी, वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है। लेकिन मां के तनाव को कम करने और सकारात्मक वातावरण बनाने में यह लाभदायक माना जाता है।

4. अकेले खाना खाने से बचें

परिवार के साथ बैठकर भोजन करना केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं है। शोध बताते हैं कि भावनात्मक सहयोग और सकारात्मक माहौल भोजन की आदतों, मानसिक स्वास्थ्य और तनाव के स्तर पर अच्छा प्रभाव डाल सकते हैं।

गर्भवती महिला को परिवार का साथ और भावनात्मक सहयोग मिलना उसकी मानसिक सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

5. पर्याप्त आराम करें

गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। इसलिए पर्याप्त आराम और अच्छी नींद बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार आराम करने से शरीर को रिकवरी का समय मिलता है और मानसिक तनाव भी कम होता है। हालांकि पूरी तरह निष्क्रिय रहने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि भी जरूरी हो सकती है।

6. हल्की तेल मालिश से मिल सकता है आराम

बालों, पैरों या शरीर की हल्की मालिश मांसपेशियों के तनाव को कम करने, आराम महसूस कराने और तनाव घटाने में मदद कर सकती है। हल्का स्पर्श शरीर की रिलैक्सेशन प्रतिक्रिया को सक्रिय कर सकता है।

यदि गर्भावस्था में कोई चिकित्सीय जटिलता हो या हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी हो, तो मालिश कराने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

क्या रखें ध्यान?

विशेषज्ञों का मानना है कि दादी-नानी की कई पारंपरिक सलाह अनुभव पर आधारित होती हैं और उनमें से कुछ का वैज्ञानिक समर्थन भी मिलता है। फिर भी हर गर्भावस्था अलग होती है। इसलिए किसी भी खानपान, दवा, सप्लीमेंट या घरेलू उपाय को अपनाने से पहले अपने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) से सलाह जरूर लें।

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