Breaking News
बीरोंखाल में श्रमिक पंजीकरण शिविर, सैकड़ों श्रमिकों ने लिया हिस्सा
बीरोंखाल में श्रमिक पंजीकरण शिविर, सैकड़ों श्रमिकों ने लिया हिस्सा
जल एवं मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
जल एवं मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
देहरादून-मसूरी मार्ग पर पानीवाला बैंड के पास गहरी खाई में मिला व्यक्ति का शव
देहरादून-मसूरी मार्ग पर पानीवाला बैंड के पास गहरी खाई में मिला व्यक्ति का शव
‘मिर्जापुर द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया तहलका, 4 दिनों में पार किया 100 करोड़ का आंकड़ा
‘मिर्जापुर द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया तहलका, 4 दिनों में पार किया 100 करोड़ का आंकड़ा
मुख्यमंत्री धामी से मिले नन्हे पर्वतारोही रियांश पंत और प्रिशा रावत
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देहरादून की बड़ी छलांग, 37वें से 12वें स्थान पर पहुंची राजधानी
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देहरादून की बड़ी छलांग, 37वें से 12वें स्थान पर पहुंची राजधानी
विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य  प्रगति की जिलाधिकारी ने की  समीक्षा, 29,929 मतदाता जांच में पाए गए अपात्र
विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य प्रगति की जिलाधिकारी ने की समीक्षा, 29,929 मतदाता जांच में पाए गए अपात्र
मसूरी के रॉक स्टोन पर चला एमडीडीए का बुलडोजर, अपर माल रोड पर अनाधिकृत निर्माण ध्वस्त
मसूरी के रॉक स्टोन पर चला एमडीडीए का बुलडोजर, अपर माल रोड पर अनाधिकृत निर्माण ध्वस्त
संसाधनों और अवसरों की कमी किसी प्रतिभाशाली युवा के सपनों की राह में नहीं बनेगी बाधा- मुख्यमंत्री
संसाधनों और अवसरों की कमी किसी प्रतिभाशाली युवा के सपनों की राह में नहीं बनेगी बाधा- मुख्यमंत्री

महायुति के रूप में चुनाव लड़ने को हुए मजबूर

महायुति के रूप में चुनाव लड़ने को हुए मजबूर

ओमप्रकाश मेहता
देश अभी भी राष्ट्रवादी की आंधी से काफी दूर है और क्षेत्रवाद अभी भी भारतीय राजनीति में सिर चढकर बोल रहा है, यह संदेश फिर एक बार हाल ही में सम्पन्न दो राज्य विधानसभाओं के चुनाव परिणामों ने स्पष्ट कर दिया है, साथ ही इन दोनों राज्यों के चुनाव परिणामों ने आज के प्रमुख राजनीतिक दलों की स्थिति को भी स्पष्ट कर दिया है। कौन सा दल कितने गहरे पानी में है, उसकी अहमियत क्या रह गई है, उसे जन समर्थन कितना प्राप्त है, इन सब सवालों का जवाब देश के प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा ‘महायुति’ बनाकर चुनाव लडऩे से स्पष्ट हो रहा है, कभी देश में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ा करती थी और सरकारें बनाती थी, वे आज ‘महायुति’ के रूप में चुनाव लडऩे को मजबूर है, यही आज की राजनीति की मजबूरी है।

हाल ही में महाराष्ट्र और झारखण्ड के चुनाव परिणामों ने जहां मोदी की कथित ‘एक-छत्रता’ की स्थिति को स्पष्ट कर दिया है वहीं देश का वास्तविक राजनीतिक चरित्र भी लाकर सामने खड़ा दिया है। आज जबकि देश की आजादी को करीब पचहत्तर साल का अरसा हो चुका है, तब यह महसूस किया जा रहा है कि अब देश का आम वोटर भी जागरूक होने लगा है और वह अब किसी लोभ-लालच या बहकावें से दूर रह कर अपने मताधिकार का उपयोग करने लगा है, नरेन्द्र मोदी एक दशक से भी अधिक समय से प्रधानमंत्री है, किंतु झारखण्ड जैसा राज्य आज भी उनके प्रभाव से मुक्त है, अपने क्षेत्रिय हित को ध्यान में रखकर अपना राजनीतिक भविष्य तय कर रहा है, यही सही अर्थों में राजनीतिक जागरूकता का परिचायक है।

इन दोनों राज्यों के चुनाव परिणामों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि दोनों राज्यों के मतदाताओं को अपनी अस्मिता से कितना लगा है, महाराष्ट्र ने जहां अपनी संस्कृति व राजनीतिक जागरूकता का परिचय देते हुए स्थानीय को महत्व देकर अपना मत प्रकट किया, वहीं झारखण्ड ने भी अपनी स्थानीयता को महत्व देते हुए, अपना मत प्रकट किया, यही आज के मतदाताओं की जागरूकता का स्पष्ट प्रमाण है, वे राष्ट्रीय और स्थानीय हितों का अंतर समझने लगे है, साथ ही इन परिणामों से यह भी स्पष्ट हो गया कि राजनीतिक दल अहम् नहीं, क्षेत्रवाद का हित सर्वोपरी है।

अब धीरे-धीरे राष्ट्रीय हो या स्थानीय सभी राजनीतिक दलों को अपनी स्थिति का भी सही अहसास हो गया है। यही मतदाताओं की जागरूकता का परिचायक है। ज्.यदि यही सिलसिला चलता रहा तो वह दिन दूर नही जब भारतीय राजनीति फिर से विश्व की ‘सिरमौर’ बनकर विश्व पर राज करेगी और विश्व के सभी देश उसके अनन्य समर्थक होंगें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top